- Advertisement -

राज ठाकरे से फिर उद्धव ठाकरे ने की मुलाकात: BMC चुनाव से पहले तेज हुई सियासत, क्या एक होंगे ठाकरे बंधु?

शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने एक बार फिर से मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे से मुलाकात की है, जिससे MVA गठबंधन में तनाव की अटकलें तेज हो गईं है और सवालों का दौर तेज हो गया है कि, क्या ठाकरे बंधु एकजुट होकर सियासी समीकरण बदलेंगे? 

5 Min Read

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर ठाकरे बंधुओं की जोड़ी सुर्खियां बटोर रही है। शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अपने चचेरे भाई और मनसे (महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना) अध्यक्ष राज ठाकरे से उनके आवास पर जाकर मुलाकात की। इस गोपनीय बैठक में शिवसेना के दिग्गज नेता संजय राउत और अनिल परब भी शामिल थे। इस मुलाकात ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव से पहले सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। क्या दोनों भाई एक बार फिर एक मंच पर आएंगे, या ये सिर्फ एक औपचारिक मुलाकात थी? आइए, इस मुलाकात के पीछे की कहानी और इसके संभावित प्रभावों को समझते हैं।

- Advertisement -
Ad image

MVA में दरार या नई रणनीति?

उद्धव और राज ठाकरे की ये मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब महा विकास अघाड़ी (MVA) गठबंधन पहले से ही आंतरिक तनाव से जूझ रहा है। सूत्रों की मानें तो हाल ही में उद्धव ठाकरे और कांग्रेस नेताओं के बीच हुई एक बैठक में कांग्रेस ने मनसे के साथ संभावित गठजोड़ को लेकर अपनी चिंता जाहिर की थी। कांग्रेस का सवाल साफ था कि अगर मनसे MVA में शामिल होती है, तो गठबंधन की एकता पर क्या असर पड़ेगा?

कहा जा रहा है कि उद्धव ठाकरे ने राज ठाकरे को MVA में शामिल होने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि, इस पर अंतिम फैसला दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान को लेना है। इस मुलाकात ने न केवल विपक्षी गठबंधन में खलबली मचाई है, बल्कि बीजेपी और एकनाथ शिंदे गुट को भी सतर्क कर दिया है। क्या ये मुलाकात BMC चुनाव में एक नया सियासी समीकरण बनाएगी?

- Advertisement -
Ad image

दशहरा रैली पर एक मंच पर आएंगे?
इस मुलाकात की एक और अहम वजह दशहरा रैली हो सकती है। शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए, हर साल दशहरा पर शिवाजी पार्क में विशाल जनसभा होती थी। लेकिन शिवसेना के बंटवारे के बाद उद्धव ठाकरे शिवाजी पार्क में, जबकि एकनाथ शिंदे नेस्को मैदान में अपनी सभा करते हैं। सूत्रों के मुताबिक, उद्धव ने राज ठाकरे को इस बार शिवाजी पार्क की दशहरा रैली में शामिल होने का न्योता दिया है।

अगर राज ठाकरे इस रैली में शिरकत करते हैं, तो ये महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा संदेश होगा। ये न केवल ठाकरे बंधुओं की एकता का प्रतीक होगा, बल्कि BMC चुनाव से पहले शिवसेना (UBT) और मनसे के गठजोड़ की संभावनाओं को भी बल देगा। सवाल ये है कि क्या राज ठाकरे इस निमंत्रण को स्वीकार करेंगे, या फिर अपनी अलग राह चुनेंगे?

BMC चुनाव की सरगर्मी

बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव महाराष्ट्र की सियासत में हमेशा से अहम रहे हैं। ये देश की सबसे अमीर नगर निगम है, और इसका नियंत्रण हर राजनीतिक दल के लिए प्रतिष्ठा का सवाल होता है। उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की मुलाकात को BMC चुनाव की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। अगर दोनों भाई एक साथ आते हैं, तो ये न केवल शिवसेना (UBT) के लिए बल्कि MVA के लिए भी गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

हालांकि, मनसे का रुख अभी साफ नहीं है। राज ठाकरे की पार्टी अतीत में शिवसेना और बीजेपी के खिलाफ मजबूती से लड़ी है, लेकिन हाल के वर्षों में उनकी सियासी रणनीति में बदलाव देखा गया है। क्या वे उद्धव के साथ हाथ मिलाएंगे, या फिर अकेले दम पर BMC चुनाव में उतरेंगे? ये सवाल दशहरा रैली तक साफ हो सकता है।

क्या कहते हैं जानकार?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उद्धव और राज की ये मुलाकात महाराष्ट्र की सियासत में एक नया मोड़ ला सकती है। अगर ठाकरे बंधु एक साथ आते हैं, तो ये शिवसेना (शिंदे गुट) और बीजेपी के लिए चुनौती बन सकता है। वहीं, MVA के भीतर कांग्रेस की नाराजगी इस गठजोड़ को जटिल बना सकती है। 

खैर उद्धव और राज ठाकरे की इस मुलाकात ने सियासी गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म जरूर कर दिया है। क्या ये मुलाकात BMC चुनाव में एक नया समीकरण बनाएगी? क्या दशहरा रैली में ठाकरे बंधु एक मंच पर नजर आएंगे? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में साफ होंगे। तब तक, महाराष्ट्र की सियासत में ये मुलाकात चर्चा का केंद्र बनी रहेगी।

Keywords – Uddhav Thackeray, Raj Thackeray, BMC Election, MVA Alliance, Shiv Sena, MNS, Mumbai Politics, Sanjay Raut

Share This Article
कोई टिप्पणी नहीं

- Advertisement -

- Advertisement -

- Advertisement -

लेटेस्ट
चुटकी शॉट्स
वीडियो
वेबस्टोरी
मेन्यू