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मुंबई का ‘शोर बाजार’ कैसे बना ‘चोर बाजार’? जानिए इस मशहूर सेकंड हैंड मार्केट की फर्स्ट हैंड कहानी

कभी 'शोर बाजार' कहलाने वाला ये इलाका आज 'चोर बाजार' के नाम से मशहूर है। जानिए कैसे बदला इसका नाम और क्यों ये मार्केट सेकंड हैंड सामान खरीदने वालों की पहली पसंद बना।

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मुंबई के भायखला इलाके में स्थित चोर बाजार का नाम सुनते ही लोगों की उत्सुकता बढ़ जाती है। पहली बार सुनने वाले अक्सर सोचते हैं कि क्या यहां सच में चोरी का सामान बिकता है? लेकिन असलियत इससे कहीं ज़्यादा इंटरस्टिंग और अलग है। यह बाजार पुराने और सेकंड हैंड सामानों का बड़ा सेंटर है, जहां विंटेज और अनोखे आइटम्स मिलते हैं, जो इसकी खास पहचान बनाते हैं।

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‘शोर बाजार’ से ‘चोर बाजार’ तक

मुंबई का यह प्रसिद्ध बाजार शुरुआत में ‘शोर बाजार’ के नाम से जाना जाता था। ब्रिटिश काल में यहां दिनभर ठेले वालों, दुकानदारों और ग्राहकों की आवाज़ से भारी शोर रहता था, इसलिए अंग्रेजों ने इसे ‘शोर बाजार’ कहा। समय के साथ लोगों के उच्चारण में बदलाव आया और ‘शोर’ शब्द धीरे-धीरे ‘चोर’ बन गया। इसके साथ ही यह भी अफवाहें फैलने लगीं कि यहां चोरी का सामान बिकता है, जिससे इस बाजार का नाम ‘चोर बाजार’ पड़ गया। इस तरह, नाम का ये बदलाव और कहानी चोर बाजार की पहचान बन गई।

क्या सच में चोरी का सामान बिकता था?

पुराने समय में चोर बाजार की बदनामी का एक कारण चोरी का सामान होना जरूर था, लेकिन असल में यहां मिलने वाला ज़्यादातर सामान सेकंड हैंड और नीलामी से आया हुआ होता था। जैसे रेलवे के पुराने टूल्स, फैक्ट्री के उपयोग में आने वाले मशीन, और अन्य सेकंड हैंड सामान यहां बिकते थे। इसलिए चोरी के सामान की जो कहानियां सुनने को मिलती हैं, वे अधिकतर अफवाह होती हैं। चोर बाजार की फेमस होने का असली कारण यहां मिलने वाला अनोखा और पुराना सामान है, जो लोगों को आकर्षित करता है।

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क्या-क्या मिलता है यहां?

चोर बाजार में आपको पुराने जमाने की कई अनोखी और खास चीजें मिलती हैं। यहां पुराने कैमरे और उनके लेंस आसानी से मिल जाते हैं, जो फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए खजाना होते हैं। ब्रिटिश राज के जमाने के लकड़ी के फर्नीचर, जैसे टेबल और कुर्सियां भी यहां मिलते हैं। विंटेज घड़ियां, ट्रांजिस्टर, और रेडियो जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स भी आपको यहां मिल जाएंगे। इसके अलावा सेकंड हैंड इलेक्ट्रॉनिक्स, पुराने फिल्मी पोस्टर, रिकॉर्ड्स, बाइक के पुराने पार्ट्स और टूल्स भी यहां उपलब्ध हैं। साथ ही, पुराने जूते, बैग और कपड़े भी चोर बाजार की खासियत हैं, जो इसे खरीददारों के लिए बेहद आकर्षक बनाते हैं।

चोर बाजार की संस्कृति

चोर बाजार की संस्कृति ही इसे खास बनाती है। यहां खरीददारी करना सिर्फ सामान लेने भर का काम नहीं, बल्कि एक अनोखा एक्सपीरियंस होता है। हर दुकान पर मोलभाव करना आम बात है और यहां बार्गेनिंग करना एक जरूरी हुनर माना जाता है। दुकानदार अक्सर किसी भी चीज़ की कीमत बहुत ज्यादा बताते हैं, लेकिन अगर आप धैर्य और समझदारी से बात करें, तो वही चीज़ आपको काफी सस्ती मिल सकती है। यहां का माहौल, लोगों का अंदाज़ और दुकानदारों से बातचीत करते हुए सौदा पक्का करना, एक ऐसा एक्सपीरियंस है जो किसी आम मॉल या शोरूम में नहीं मिलता।

आज का चोर बाजार

आज का चोर बाजार अब केवल पुराना या चोरी का सामान बेचने की जगह नहीं रहा, बल्कि यह मुंबई की एक सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान बन चुका है। यहां हर रोज़ ऐसे लोग आते हैं जो विंटेज और एंटीक चीज़ों के शौकीन हैं, चाहे वो कलाकार हों, डिज़ाइनर, कलेक्टर या फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोग। यहां मिलने वाला पुराना फर्नीचर, घड़ियां, टेलीफोन, कैमरे और पोस्टर जैसी चीज़ें घर की सजावट के लिए भी खूब खरीदी जाती हैं। यही वजह है कि चोर बाजार अब एक ट्रेंडी डेस्टिनेशन बन गया है, जहां हर चीज़ के पीछे एक कहानी होती है।

कैसे जाएं और कब जाएं?

  • स्थान: भायखला, मुंबई
  • निकटतम रेलवे स्टेशन: भायखला स्टेशन (10 मिनट पैदल)
  • समय: आमतौर पर सुबह 11 बजे खुलता है और शाम तक चलता रहता है
  • बंद: शुक्रवार को बंद रहता है
  • सुझाव: भीड़ भाड़ और गर्मी से बचने के लिए सुबह जल्दी जाएं

बाजार की मज़ेदार बातें

चोर बाजार से जुड़ी कई मज़ेदार और दिलचस्प बातें सुनने को मिलती हैं। कहा जाता है कि अगर किसी का सामान कहीं खो जाए, तो लोग मज़ाक में कहते हैं कि “चोर बाजार में ढूंढ लो, शायद मिल जाए।” यह कहावत आज भी आम बोलचाल में सुनने को मिलती है। पुराने जमाने में तो यह भी माना जाता था कि पुलिस कई बार चोरी हुए सामान की तलाश में चोर बाजार पहुंचती थी, क्योंकि कई बार वहां ऐसे सामान मिल जाते थे जो चोरी हुए होते थे। ऐसे किस्सों ने इस बाजार को और भी रहस्यमयी और चर्चित बना दिया है।

चोर बाजार की चुनौतियां

चोर बाजार मुंबई का एक मशहूर और रोचक स्थान है, लेकिन यहां कुछ चुनौतियां भी हैं जिनका ध्यान रखना जरूरी है। सबसे बड़ी समस्या यहां बढ़ती भीड़ और ट्रैफिक की है, जिससे बाजार में घुमना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा, नकली और कम क्वालिटी के सामान की भरमार भी रहती है, जिससे खरीददारों को सावधानी बरतनी पड़ती है। बेहतर होगा कि आप केवल भरोसेमंद दुकानदारों से ही सामान खरीदें ताकि धोखा न हो। इन बातों का ध्यान रखकर ही आप चोर बाजार की खरीदारी का सही आनंद ले सकते हैं।

चोर बाजार सिर्फ एक मार्केट नहीं, बल्कि मुंबई की संस्कृति और इतिहास का एक अहम हिस्सा है। यहां जाकर आपको पुराने जमाने की खुशबू, लोगों की जुबानी कहानियां और खरीदारी का अलग ही मज़ा मिलेगा। यह जगह उन लोगों के लिए खास है जो नॉस्टैल्जिया, एंटीक और विंटेज चीज़ों के शौकीन हैं।

तो अगली बार जब आप मुंबई जाएं, तो इस अनोखे बाजार की सैर जरूर करें और देखें कि कैसे ‘शोर’ बना ‘चोर’ और फिर इस बाजार ने कैसे समय के साथ खुद को ढाला।

Keywords: Second-Hand Market, History Of Chor Bazaar, Thieves Market Mumbai

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