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मुंबई का एंटोनियो डी’सूज़ा स्कूल 200 साल का हुआ, राज कपूर समेत कई दिग्गज रहे हैं छात्र

बायकुला स्टेशन के सामने स्थित एंटोनियो डी'सूज़ा स्कूल सिर्फ एक स्कूल नहीं, बल्कि मुंबई के इतिहास, सामाजिक बदलाव और शिक्षा की दो सदियों का गवाह है।

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बहुत कम संस्थान ऐसे होते हैं जो 200 वर्षों तक अपनी पहचान और प्रासंगिकता बनाए रख पाते हैं। इतना लंबा समय अक्सर सामूहिक स्मृति से भी परे चला जाता है। बाबुलनाथ मंदिर और एलीफेंटा गुफाओं जैसे ऐतिहासिक स्थानों के अलावा, मुंबई में गिने-चुने ही ऐसे संस्थान हैं जिन्होंने द्विशताब्दी (200 वर्ष) का गौरव हासिल किया हो। इन्हीं में शामिल है बायकुला स्टेशन के सामने स्थित एक कम चर्चित लेकिन ऐतिहासिक स्कूल, एंटोनियो डी’सूज़ा स्कूल।

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मझगांव के द्वीप से शुरू हुई कहानी

एंटोनियो डी’सूज़ा स्कूल, जो आज ग्लोरिया चर्च के पीछे स्थित है, अपनी जड़ें उस दौर के मझगांव से जोड़ता है, जब यह क्षेत्र एक अलग द्वीप हुआ करता था। ग्लोरिया चर्च की स्थापना 1548 में कैप्टन एंटोनियो पेसो की हवेली में एक निजी चैपल के रूप में की गई थी, जिसे नोसा सेन्होरा दा ग्लोरिया के नाम से जाना जाता था।

1795 में रखी गई शिक्षा की नींव

1795 में, गोवा के व्यापारी एंटोनियो डी सूज़ा ने रोमन कैथोलिक बच्चों के लिए एक निःशुल्क प्राथमिक विद्यालय की स्थापना के उद्देश्य से चर्च ट्रस्टियों को 40,000 रुपये की बड़ी राशि दान में दी। इसी दान से एंटोनियो डी’सूज़ा स्कूल की नींव पड़ी, जिसने समय के साथ शिक्षा के क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बनाई।

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देश को दिए दिग्गज नाम

इन दो सौ सालों में यहां से पढ़कर निकले कई लोग देशभर में नाम कमा चुके हैं। स्कूल के एलुमनाई में राज कपूर जैसे दिग्गज एक्टर-फिल्ममेकर और निस्सिम एज़ेकियल जैसे कवि शामिल हैं। निस्सिम एज़ेकियल को आधुनिक भारतीय अंग्रेज़ी कविता का जनक भी माना जाता है और वो पोस्ट-कोलोनियल भारत के सबसे असरदार अंग्रेज़ी कवि भी कहे जाते हैं।

Keywords: Antonio D’Souza School, Mumbai Heritage School, Colonial Education India

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