बीएमसी की मेयर रितु तावड़े की आधिकारिक कार और उनके काफिले की एस्कॉर्ट गाड़ी पर लगी लाल-नीली बीकन लाइट्स हटा दी गई हैं। यह फैसला सोशल मीडिया पर उठे विवाद और विपक्ष की आपत्तियों के बाद लिया गया। यह मुद्दा पहली बार 11 मार्च को तब चर्चा में आया, जब इंटरनेट पर मेयर की गाड़ी की तस्वीरें साझा की गईं और लोगों ने सवाल उठाया कि क्या ऐसी लाइट लगाने की अनुमति है। इसके बाद 13 मार्च को आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने मेयर को पत्र भेजकर इन बीकन लाइट्स के उपयोग पर स्पष्टीकरण मांगा।
नियमों के खिलाफ बताई गई बीकन लाइट
अनिल गलगली ने अपने पत्र में कहा कि कुछ सरकारी और एस्कॉर्ट वाहनों पर लाल और पीली बत्तियों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो नियमों के मुताबिक सही नहीं है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार के निर्देशों के अनुसार ऐसी बीकन लाइट्स का उपयोग आम तौर पर प्रतिबंधित है और इन्हें केवल सीमित आपातकालीन सेवाओं के वाहनों को ही लगाने की अनुमति दी जाती है।
बयान के बाद बढ़ी सियासी बहस
विवाद बढ़ने के बाद रितु तावड़े ने कहा कि उन्हें अपनी गाड़ी पर बीकन लाइट लगाने में कोई खास रुचि नहीं है। उन्होंने इसे प्रशासन की गलती बताते हुए कहा कि जनता के बीच जाने के लिए उन्हें किसी खास बत्ती की जरूरत नहीं है। उनके मुताबिक सरकारी वाहन देते समय अधिकारियों को पहले ही जांच कर लेनी चाहिए थी कि ऐसी लाइट लगाने की अनुमति है या नहीं।
इस मुद्दे पर राजनीति भी तेज हो गई है। किशोरी पेडनेकर ने इस मामले को लेकर भाजपा पर निशाना साधा और कहा कि जब नरेंद्र मोदी की सरकार वीआईपी कल्चर खत्म करने की बात करती है, तो फिर मेयर की गाड़ी पर ऐसी लाइट क्यों लगाई गई। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या मेयर खुद को प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से भी ऊपर समझने लगी हैं।
मुख्यमंत्री ने किया मेयर का बचाव
विवाद बढ़ने के बाद देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि जांच में सामने आया है कि गाड़ी की छत पर नहीं, बल्कि सामने के हिस्से पर लाइट लगी थी। उन्होंने कहा कि इस मामले में मेयर रितु तावड़े को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराना ठीक नहीं है और उन्हें अनावश्यक रूप से निशाना बनाया जा रहा है।
गौरतलब है कि भारत सरकार ने 1 मई 2017 से सरकारी वाहनों पर लाल बीकन के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। इस फैसले के तहत सरकारी या किराए की गाड़ियों पर लाल बत्ती, नेम प्लेट, प्रतीक चिह्न या झंडे जैसे विशेष संकेत लगाने की अनुमति नहीं है। ऐसी सुविधाएं केवल कुछ जरूरी आपातकालीन सेवाओं के वाहनों को ही दी गई हैं।
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