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चुनाव से पहले ही महायुति की बल्ले-बल्ले! बिना मतदान के ही बीजेपी-शिवसेना की झोली में आई 66 सीटें, जानें इसके पीछे की गणित

महाराष्ट्र नगर निकाय चुनाव से पहले ही महायुति को एक बहुत ही बड़ी जीत हासिल हुई है। वोटिंग से पहले ही बीजेपी-शिवसेना को 66 सीटों का फायदा मिला है और एनसीपी ने भी 2 सीटों पर अपना हक़ जमाया हुआ है।

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Maharashtra Local Body Election: आगामी BMC चुनाव को लेकर राजनीति गलियारों में तैयारीयां जोरो-शोरो से शुरू हो गयी है। सभी पार्टियां अपने-अपने उम्मीदवारों के नाम के साथ चुनावी मैदान में उतर चुके है लेकिन इसी बीच चुनाव से पहले महायुति को एक बड़ी गुडन्यूज़ मिली है जिसके बाद उनके कई सीटों पर जीत पक्की होती नजर आ रही है। दरअसल, शुक्रवार को उमीदवारो के नाम वापस लेने की आखिरी तारीख थी। विपक्षी पार्टियों और गठबंधनों के कई उम्मीदवार मैदान से हट गए। जिसका सीधा फायदा महायुति को मिला और उनके 68 उम्मीदवार बिना वोटिंग के ही जीत गए।

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बता दें, इनमें से 44 भाजपा के सीटें हैं, बाकी शिवसेना (शिंदे गुट) और दूसरे साथी दलों से। ये सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि दिखाता है कि सत्ताधारी गठबंधन ने स्थानीय स्तर पर संगठन और समीकरण अच्छे से साधे हैं। जब कोई मुकाबला ही नहीं बचा, तो जाहिर है विपक्ष कई जगहों पर महायुति को टक्कर देने के हाल में नहीं दिखा।

MMR में महायुति का दबदबा

मुंबई महानगर क्षेत्र यानी MMR में तो महायुति का जलवा साफ नजर आया। यहां कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में सबसे ज्यादा 21 उम्मीदवार बिना किसी मुकाबले जीत गए। इनमें 15 भाजपा और 6 शिवसेना के हैं। यह इलाका पहले से ही राजनीतिक रूप से काफी गर्म रहा है। ऐसे में इतनी बड़ी तादाद में निर्विरोध जीतना महायुति के लिए बड़ा मनोबल बढ़ाने वाला है। पनवेल में भी भाजपा के सात उम्मीदवार बिना चुनाव के चुन लिए गए। MMR के बाकी हिस्सों में भी महायुति का असर साफ दिखा, जिससे लगता है कि शहरी वोटर इस वक्त गठबंधन के साथ खड़े हैं।

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उत्तर महाराष्ट्र में भी महायुति को मिली सीटें

अब बात करें उत्तर महाराष्ट्र और पुराने गढ़ों की तो जिसमें, जलगांव में भी महायुति ने अपनी पकड़ साबित कर दी। भाजपा और शिवसेना, दोनों को यहां छह-छह सीटें बिना लड़े मिल गईं। इससे साफ है कि इनका पारंपरिक आधार अब भी मजबूत है। भिवंडी में भाजपा ने छह सीटें ऐसे ही जीत लीं, जबकि यहां लम्बे समय से एनसीपी (शरद पवार गुट) का बोलबाला रहा है। धुले में भी भाजपा के तीन उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए गए। अहिल्यानगर में एनसीपी को दो और भाजपा को एक सीट मिली। इन सब नतीजों ने बता दिया कि महायुति ने न सिर्फ अपने गढ़ बचाए, बल्कि विरोधियों के इलाके में भी सेंध लगा दी।

क्या है आगे की रणनीति?

ठाणे में भाजपा-शिवसेना (शिंदे गुट) के रिश्तों में चाहे जितना तनाव हो, शिवसेना ने यहां छह सीटें जीतकर अपनी मौजूदगी दिखा दी। इसी जिले में राज ठाकरे की मनसे ने चुनावी प्रक्रिया पर विरोध भी जताया, जिससे माहौल थोड़ा गर्म जरूर हुआ। राजनीति के जानकार मानते हैं, ये जीतें हाल की नगर परिषद चुनावों की क्लीन स्वीप के बाद महायुति के लिए एक और पॉजिटिव सिग्नल हैं। ऊपर से, जहां उम्मीदवार निर्विरोध जीत गए, वहां अब पार्टी को प्रचार में पैसे और मेहनत नहीं लगानी पड़ेगी। इसका मतलब, बाकी मुश्किल इलाकों में वो पूरी ताकत झोंक सकते हैं।

Keywords: Mahayuti Alliance, Maharashtra Civic Elections, BJP Unopposed Wins, Shiv Sena Shinde Faction, Maharashtra Politics

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