लगातार चुनावी हार, नेतृत्व पर उठते सवाल और पार्टी के भीतर बढ़ती असंतोष की स्थिति से ध्यान हटाने के लिए उबाठा गुट के नेता “सांसद टूटेंगे” और “ऑपरेशन टाइगर” जैसी अफवाहें फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। यह आरोप शिवसेना सांसद नरेश म्हस्के ने लगाया है। ठाणे में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने साफ कहा कि एकनाथ शिंदे और उबाठा सांसदों की कथित बैठक से जुड़ी खबरें पूरी तरह झूठी और भ्रामक हैं, जिन्हें वे पूरी तरह खारिज करते हैं।
ऑपरेशन टाइगर” की खबरें पूरी तरह झूठी: म्हस्के
सांसद नरेश म्हस्के ने कहा कि कुछ दिन पहले केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव ने महाराष्ट्र के सभी दलों के सांसदों के लिए एक स्नेह भोज आयोजित किया था। उन्होंने बताया कि दिल्ली में अलग-अलग दलों के सांसदों का आपस में मिलना और बातचीत करना सामान्य बात है, इसे किसी राजनीतिक टूट से जोड़ना गलत है। इसी आधार पर “ऑपरेशन टाइगर” से जुड़ी खबरों को उन्होंने पूरी तरह निराधार बताया। म्हस्के ने यह भी स्पष्ट किया कि उबाठा गुट के सांसदों को लेकर किसी भी तरह की कोई बैठक नहीं हुई है। साथ ही शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे और सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे ने भी इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है।
उबाठा नेतृत्व पर कार्यकर्ताओं में नाराज़गी का दावा
सांसद नरेश म्हस्के ने कहा कि उबाठा गुट के नेतृत्व को लेकर पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ रहा है। उनके अनुसार, पार्टी ने कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया, जिससे नाराज़गी की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान नेतृत्व सीमित रहा, जिससे कार्यकर्ता और अधिक असंतुष्ट हुए। म्हस्के ने कहा कि पार्टी में कथित असंतोष को लेकर “टूट” की जो खबरें फैलाई जा रही हैं, वे पूरी तरह गलत हैं और इन्हें जानबूझकर उबाठा के कुछ नेता ही प्रचारित कर रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अपने ही सांसदों पर भरोसा न होने के कारण उन्हें बदनाम करने के लिए संजय राउत की ओर से झूठी खबरें फैलाई जा रही हैं।
उबाठा में अंदरूनी कलह और कमजोर होती स्थिति का दावा
सांसद नरेश म्हस्के ने कहा कि संजय राउत की रणनीतियों के चलते उबाठा गुट राजनीतिक रूप से कमजोर स्थिति में पहुंच गया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पार्टी के भीतर आदित्य ठाकरे और संजय राउत के बीच मतभेद बढ़ रहे हैं और हालात ऐसे हैं कि नेतृत्व पर सवाल उठने लगे हैं। म्हस्के के अनुसार, उद्धव ठाकरे का राजनीतिक प्रभाव लगातार घटता जा रहा है, जबकि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना मजबूत होकर उभर रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सांसद अरविंद सावंत को लेकर फैलाई जा रही नकारात्मक खबरें पार्टी के भीतर ही कुछ विरोधी गुटों की साजिश का हिस्सा हैं, जिसके चलते उन्हें बार-बार सफाई देनी पड़ रही है।
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