मुंबई: महाराष्ट्र के बारामती में हुए विमान क्रैश में उपमुख्यमंत्री अजित पवार की मौत के बाद चारो तरफ एक मातम पसर गया है। अजित पवार को लेकर हर दल के नेता यही कहते हैं कि उन्होंने कभी किसी को शत्रू मानकर राजनीति नहीं की। यही कारण है उन्हें अजातशत्रु के नाम से भी पुकारते थे। अजित पवार ने सभी दलों के नेताओं से अपना एक अलग रिश्ता बनाये रखा। अपने बेबाक अंदाज और सीधे खरी खरी बोल देना उनके व्यक्तित्व में शामिल था।
प्लेन क्रैश के साथ अजित पवार के पारी का अनंत हुआ। लेकिन राजनीती के गलियारों में उन्हें एक बेहतरीन और शानदार नेता के तौर पर उन्हें हमेशा याद किया जाएगा। उन्हें लोग अजित दादा पवार के नाम पुकारा जाता था। लेकिन अब अजित पवार दुनिया में नहीं रहे। इसी के साथ चाचा भतीजे की वो जोड़ी भी टूट गई जो महाराष्ट्र के राजनीति की सबसे धाकड़ जोड़ी मानती जाती थी। शरद पवार से अलग होने के बाद भी अजित पवार ने अपने चाचा का साथ नहीं छोड़ा था। दोनों अक्सर कई बार एक साथ नजर आयें। इसके साथ ही परिवार में भी पार्टी से अलग होकर नई पार्टी बनाने के बाद खटास नहीं आई।
अजित पवार जब हुए चाचा शरद पवार से अलग
महाराष्ट्र की राजनीति में साल 2019 में एक बड़ी नाटकीय घटना घटी। सुबह का वक्त था अजित पवार का एक फोटो वायरल हुआ और उसमें वो डेप्युटी सीएम पद की शपथ लेते नजर आये। जो साफ़ इशारा था कि अब अजित पवार ने अपने चाचा की पार्टी एनसीपी में सेंध लगा दी है। लेकिन शरद पवार के पॉवर के आगे अजित पवार की दाल नहीं गली और उन्हें लौटकर फिर से एनसीपी में आना पड़ा। जुलाई 2023 में महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला, जब अजित पवार ने एनसीपी में अलग राह अपनाने का फैसला किया। इस कदम से पार्टी में बड़ा विभाजन हुआ और शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी को राजनीतिक झटका लगा। अजित पवार के साथ कई विधायक और नेता उनके खेमे में शामिल हो गए, जिससे सत्ता समीकरण पूरी तरह बदल गए।
इसके बाद अजित पवार ने भाजपा और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ गठबंधन कर सरकार में प्रवेश किया। इस राजनीतिक फेरबदल के साथ वे एक बार फिर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री बने। इस घटनाक्रम ने न केवल राज्य की राजनीति की दिशा बदली, बल्कि एनसीपी के भीतर शक्ति संतुलन को भी नए सिरे से परिभाषित कर दिया।
कब कब कौनसा पदभार अजित पवार ने संभाला
अजित पवार के राजनीतिक जीवन पर नजर डालें तो वे लंबे समय तक सत्ता और शासन व्यवस्था का अहम हिस्सा रहे हैं। उन्होंने जून 1991 से नवंबर 1992 तक कृषि और बिजली राज्य मंत्री के रूप में कार्य किया, इसके बाद नवंबर 1992 से फरवरी 1993 तक जल आपूर्ति, बिजली और योजना विभाग की जिम्मेदारी संभाली। अक्टूबर 1999 से जुलाई 2004 तक वे सिंचाई और बागवानी मंत्री रहे, जबकि जुलाई 2004 से नवंबर 2004 के बीच ग्रामीण विकास, जल आपूर्ति एवं स्वच्छता और सिंचाई विभाग उनके पास रहे। नवंबर 2004 से नवंबर 2009 तक उन्होंने जल संसाधन मंत्री के रूप में कार्य किया और इसके बाद नवंबर 2009 से नवंबर 2010 तक जल संसाधन और ऊर्जा विभाग की जिम्मेदारी संभाली। नवंबर 2010 से सितंबर 2012 और फिर दिसंबर 2012 से सितंबर 2014 तक वे वित्त, योजना और ऊर्जा विभाग के साथ उपमुख्यमंत्री रहे।
इसके अलावा अजित पवार कुल पांच बार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री बने10 नवंबर 2010 से 25 सितंबर 2012 और 25 अक्तूबर 2012 से 26 सितंबर 2014 तक पृथ्वीराज चव्हाण के नेतृत्व वाली सरकार में, 23 से 26 नवंबर 2019 तक देवेंद्र फडणवीस के साथ, 30 दिसंबर 2019 से 29 जून 2022 तक उद्धव ठाकरे सरकार में और 2 जुलाई 2023 से वर्तमान में एकनाथ शिंदे–देवेंद्र फडणवीस सरकार में उपमुख्यमंत्री के रूप में कार्यरत हैं।
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