आज के समय में फिटनेस ट्रेंड्स लगातार बदल रहे हैं। कभी लोग केवल दौड़ना और जॉगिंग को ही फिट रहने का ज़रिया मानते थे, फिर एरोबिक्स आया जिसने दिल और पैरों की मज़बूती पर ध्यान दिया। लेकिन अब फिटनेस की दुनिया में एक नया नाम जुड़ गया है क्वाड्रोबिक्स (Quadrobics)। यह एक ऐसा वर्कआउट है जिसमें इंसान चारों हाथ-पैर का इस्तेमाल करके जानवरों जैसी हरकतें करता है। यानी कभी रेंगना, कभी कूदना, तो कभी बैलेंस बनाकर चलना। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे कहीं भी और बिना किसी उपकरण के किया जा सकता है। इस कारण यह उन लोगों के लिए भी आसान है जो जिम नहीं जा पाते, फिर भी पूरे शरीर को मज़बूत बनाना चाहते हैं।
क्वाड्रोबिक्स की अनोखी पहचान
कई लोग यह सोच सकते हैं कि दूसरी एक्सरसाइज़ में भी तो हाथ और पैर दोनों चलते हैं, फिर इसमें नया क्या है? लेकिन क्वाड्रोबिक्स की सबसे बड़ी खासियत यही है कि इसमें शरीर के सभी चार अंगों का एक साथ तालमेल होना ज़रूरी है। जहां पारंपरिक एरोबिक्स में ज़्यादातर पैर और दिल पर ध्यान रहता है, वहीं क्वाड्रोबिक्स पूरे शरीर को एक साथ सक्रिय कर देता है। यह एक्सरसाइज़ जानवरों की नैचुरल हरकतों से प्रेरित है, इसलिए इसमें लचीलापन (flexibility) और कार्यात्मक गतिशीलता (functional movement) भी बढ़ती है। यह न केवल फिटनेस को मज़ेदार बनाता है, बल्कि शरीर को रोज़मर्रा के कामों के लिए और मज़बूत बनाता है।
कौन-कौन सी एक्सरसाइज़ होती हैं क्वाड्रोबिक्स में?
क्वाड्रोबिक्स में कई तरह की गतिविधियाँ शामिल हैं जो शरीर को अलग-अलग तरीकों से चुनौती देती हैं। जैसे-
क्रैब वॉक- जिसमें इंसान ज़मीन पर बैठकर, कमर को हल्का ऊपर उठाकर हाथ-पैरों के सहारे चलता है।
मंकी वॉक- जिसमें स्क्वाट की पोज़िशन से साइड में तेज़ मूवमेंट किए जाते हैं।
लेपर्ड क्रॉल यानी ज़मीन के बेहद पास घुटनों को मोड़कर धीरे-धीरे रेंगना।
इसके अलावा फ्रॉग जंप, गोरिल्ला वॉक, लिज़र्ड क्रॉल, स्पाइडर वॉक, स्कॉर्पियन ट्विस्ट, पैंथर वॉक और एलीगेटर क्रॉल जैसी एक्सरसाइज़ भी की जाती हैं। ये सभी मिलकर शरीर को हर तरह की मूवमेंट की प्रैक्टिस देती हैं चाहे वो कूदना हो, बैलेंस बनाना हो या ताकत दिखाना।
सेहत पर क्वाड्रोबिक्स का असर
क्वाड्रोबिक्स का असर शरीर पर कई स्तरों पर दिखाई देता है। यह वर्कआउट दिल और फेफड़ों की क्षमता बढ़ाकर दिल को स्वस्थ रखता है और कैलोरी बर्न करके मोटापे से बचाता है। इसमें शरीर की हर मसल सक्रिय होती है चाहे वो कोर हो, कंधे हों, बाजू हों, पैर हों या पीठ। यही वजह है कि यह पूरे शरीर की ताकत और सहनशक्ति को बढ़ाता है। इसके अलावा यह कोऑर्डिनेशन और बैलेंस को भी मज़बूत बनाता है, जिससे व्यक्ति की रोज़मर्रा की फुर्ती और कार्यक्षमता बेहतर होती है।
डॉक्टरों का मानना है कि क्वाड्रोबिक्स न केवल फिटनेस बल्कि बीमारियों की रोकथाम में भी मदद करता है। क्योंकि जब दिल और शरीर दोनों मज़बूत होते हैं, तो डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट डिसीज़ जैसी समस्याओं का ख़तरा कम हो जाता है। यानी यह एक ऐसी एक्सरसाइज़ है जो मज़ेदार भी है और लंबे समय तक सेहतमंद रहने का ज़रिया भी।
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