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‘जले हुए नोट’ विवाद में घिरे जस्टिस यशवंत वर्मा का इस्तीफा

इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा ने राष्ट्रपति को अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया है। इससे पहले उनके आवास पर कथित तौर पर कैश मिलने को लेकर विवाद हुआ था, जिसके बाद उनका दिल्ली हाई कोर्ट से वापस इलाहाबाद तबादला कर दिया गया था।

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इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा ने राष्ट्रपति को अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया है। इससे पहले उनके आवास पर कथित तौर पर कैश मिलने को लेकर विवाद हुआ था, जिसके बाद उनका दिल्ली हाई कोर्ट से वापस इलाहाबाद तबादला कर दिया गया था। उन्होंने 5 अप्रैल 2025 को शपथ ली थी और फिलहाल उनके खिलाफ आरोपों के संबंध में आंतरिक जांच चल रही है। ऐसे में उन्हें संसद द्वारा पद से हटाए जाने की प्रक्रिया शुरू होने की भी संभावना जताई जा रही है। जस्टिस यशवंत वर्मा का तबादला उनके आवास पर कथित तौर पर जले हुए नोट मिलने के बाद उठे विवाद के चलते हुआ था।

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बता दें कि हालांकि उन्होंने इस पद पर कार्य करना अपने लिए गर्व की बात बताया, लेकिन अंततः उन्होंने इस्तीफा देने का फैसला किया। जस्टिस यशवंत वर्मा ने अपने त्यागपत्र में लिखा कि वे उन परिस्थितियों का विस्तार से उल्लेख नहीं करना चाहते, जिनकी वजह से उन्हें यह निर्णय लेना पड़ा। उन्होंने खेद जताते हुए कहा कि वे इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायाधीश पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे रहे हैं।

कौन हैं जस्टिस यशवंत वर्मा?

जस्टिस यशवंत वर्मा का जन्म 6 जनवरी 1969 को इलाहाबाद में हुआ था। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज से बी.कॉम (ऑनर्स) किया और फिर मध्य प्रदेश के रीवा विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री हासिल की। पेशेवर जीवन की शुरुआत उन्होंने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में वकालत से की, जहां उन्होंने कॉर्पोरेट, टैक्स, संवैधानिक, श्रम और औद्योगिक कानून जैसे विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए अनुभव प्राप्त किया।

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उन्होंने 1992 में वकील के तौर पर पंजीकरण कराया और लंबे समय तक न्यायालय में सक्रिय रहे। 13 अक्टूबर 2014 को उन्हें इलाहाबाद हाई कोर्ट में अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया, जिसके बाद 1 फरवरी 2016 को उन्होंने स्थायी न्यायाधीश के रूप में शपथ ली।

न्यायाधीश बनने से पहले भी उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। 2006 से लेकर पदोन्नति तक वे इलाहाबाद उच्च न्यायालय में विशेष अधिवक्ता के रूप में कार्यरत रहे। इसके अलावा, 2012 से अगस्त 2013 तक उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य स्थायी अधिवक्ता की भूमिका भी निभाई और इसी दौरान उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा मिला।

जानें क्या है पूरा मामला

यह मामला जस्टिस यशवंत वर्मा से जुड़ा है, जो पहले दिल्ली हाई कोर्ट में रहे और बाद में इलाहाबाद हाई कोर्ट से संबद्ध हुए। मार्च 2025 में यह प्रकरण तब चर्चा में आया, जब उनके दिल्ली स्थित सरकारी आवास पर आग लगने की घटना सामने आई। जानकारी के अनुसार, 14 मार्च 2025 को तुगलक क्रीसेंट स्थित उनके आधिकारिक निवास के एक स्टोर रूम में आग भड़क उठी। आग बुझाने के लिए मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड और पुलिस टीम को वहां 500 रुपये के जले और आंशिक रूप से जले नोटों के बंडल मिले, जिसके बाद यह मामला सुर्खियों में आ गया।

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