केरल का सबरीमाला मंदिर, जहां हर साल लाखों लोग भगवान अयप्पा के दर्शन करने आते हैं, इन दिनों एक अजीब विवाद की चपेट में है। मंदिर की द्वारपालक मूर्तियों पर लगे सोने में भारी कमी पाई गई है। यह कमी कोई छोटी-मोटी नहीं, बल्कि पूरे 4.54 किलो सोने की है। लोग हैरान हैं कि आखिर इतना सोना कहां चला गया। केरल हाई कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लिया और जांच के सख्त आदेश दे दिए। अदालत का कहना है कि यह कोई साधारण बात नहीं है और इसकी गहराई से पड़ताल होनी चाहिए।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई
यह सब 2019 में शुरू हुआ, जब त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड ने मूर्तियों पर लगे तांबे के पत्रों को मरम्मत के लिए उतारा। इन पत्रों पर सोने की परत चढ़ी हुई थी। जब इन्हें उतारा गया, तो कुल वजन 42.8 किलो था। लेकिन जब इन्हें चेन्नई की एक कंपनी के पास भेजा गया, तो वजन घटकर सिर्फ 38.25 किलो रह गया। मतलब साफ है, बीच में 4.54 किलो सोना गायब हो गया। बोर्ड ने यह काम बिना कोर्ट या किसी विशेष अधिकारी को बताए किया था, जो अब सवालों के घेरे में है।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
केरल हाई कोर्ट के जस्टिस राजा विजयराघवन वी और केवी जयकुमार की बेंच ने इस पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि 4.541 किलो का यह अंतर चौंकाने वाला है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मूर्तियां 1999 में लगाई गई थीं और इन पर 40 साल की गारंटी थी। लेकिन सिर्फ छह साल बाद ही इनमें समस्या आ गई, जिसके चलते 2019 में दोबारा सोने की परत चढ़ाने का फैसला लिया गया। कोर्ट ने बोर्ड को फटकार लगाते हुए कहा कि ऐसी चीजें आस्था से जुड़ी हैं और इनमें कोई लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
सोना गायब होने का रहस्य
जब तांबे के पत्रों को कंपनी के पास भेजा गया, तो रास्ते में या संभालते समय क्या हुआ, यह किसी को नहीं पता। कंपनी ने बाद में इन पर नई सोने की परत चढ़ाई और वजन थोड़ा बढ़कर 38.65 किलो हो गया, लेकिन यह भी शुरुआती वजन से काफी कम था। भक्त उन्नीकृष्णन पोट्टी ने इन पत्रों को चेन्नई तक पहुंचाया था, लेकिन बीच की कड़ी में क्या गड़बड़ी हुई, यह जांच का विषय है। मंदिर प्रशासन अब इस पर सफाई दे रहा है, लेकिन लोग संतुष्ट नहीं हैं।
जांच के आदेश और समयसीमा
हाई कोर्ट ने त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड के चीफ विजिलेंस और सिक्योरिटी ऑफिसर को जांच सौंपी है। यह अधिकारी पुलिस अधीक्षक स्तर के हैं और इन्हें तीन हफ्ते के अंदर पूरी रिपोर्ट देनी है। कोर्ट ने सभी रजिस्टर, रिकॉर्ड और दस्तावेज सौंपने का भी निर्देश दिया। बोर्ड को जांच में पूरा सहयोग करने को कहा गया है। यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सबरीमाला जैसे पवित्र जगह पर ऐसी घटना से लोगों की भावनाएं आहत हो रही हैं।
आस्था पर उठते सवाल
सबरीमाला मंदिर सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की श्रद्धा का प्रतीक है। यहां आने वाले भक्त साल भर इंतजार करते हैं। अब सोने की कमी ने मंदिर के प्रबंधन पर उंगली उठा दी है। लोग पूछ रहे हैं कि अगर मूर्तियों का सोना सुरक्षित नहीं, तो बाकी चीजें कैसी होंगी। यह मामला अब पारदर्शिता और जवाबदेही की मिसाल बन सकता है। कोर्ट की सख्ती से उम्मीद है कि सच जल्द सामने आएगा और मंदिर की गरिमा बनी रहेगी। मंदिर प्रशासन को अब ज्यादा सतर्क रहना होगा ताकि भविष्य में ऐसी कोई घटना न हो। भक्तों का विश्वास बनाए रखना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
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