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TMC नेता सदन में बैठ कर पी रहे थे e-cigarette! अनुराग ठाकुर ने उठाया सवाल, तो मचा बवाल

बीजेपी नेता अनुराग ठाकुर ने टीएमसी सांसद पर सदन में ई-सिगरेट पीने का आरोप लगाया, जिसके बाद संसद में हंगामा हुआ। भारत सरकार ने पहले ही ई-सिगरेट पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।

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भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने गुरुवार (11 दिसंबर) को तृणमूल कांग्रेस के एक सांसद पर लोकसभा में ई-सिगरेट पीने का आरोप लगाया। ठाकुर ने यह आरोप लोकसभा में बोलते हुए लगाया। ठाकुर ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला से पूछा, “देशभर में ई-सिगरेट बैन हो चुकी है, क्या आपने इसे अनुमति दी है?” इस पर बिड़ला ने जवाब दिया कि उन्हें ऐसी कोई अनुमति नहीं दी गई। हालांकि, ठाकुर ने उस तृणमूल कांग्रेस सांसद का नाम नहीं लिया।

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ठाकुर ने आरोप लगाया, “सर, तृणमूल कांग्रेस के सांसद कई दिनों से लगातार बैठकर पी रहे हैं।” उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से उस सांसद के खिलाफ कार्रवाई करने की अपील की। बिड़ला ने कहा कि अगर सांसद ने नियमों का उल्लंघन किया तो उचित कार्रवाई की जाएगी।

https://twitter.com/BefittingFacts/status/1999000975781265859

भारत में ई-सिगरेट पर प्रतिबंध क्यों लगा?

ई-सिगरेट पर प्रतिबंध का आधार 20 मई 2019 को भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) द्वारा जारी किया गया व्हाइट पेपर था। इस पेपर में बताया गया कि ई-सिगरेट नई पीढ़ी में यह भ्रम फैला रही है कि यह सामान्य सिगरेट से कम हानिकारक है। लेकिन रिसर्च से पता चला कि ई-सिगरेट में मौजूद निकोटिन, फ्लेवरिंग एजेंट और अन्य केमिकल फेफड़ों के लिए खतरनाक होते हैं। ICMR ने चेतावनी दी कि यह लत का कारण बन सकती है, सांस की बीमारियों को बढ़ा सकती है और लंबे समय में कैंसर का खतरा भी बढ़ा सकती है। इन वैज्ञानिक फैक्ट्स को देखते हुए, केंद्र सरकार ने इसे पूरी तरह से बैन कर दिया।

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क्या होती है ई-सिगरेट और कितनी है खतरनाक?

ई-सिगरेट एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है जिसमें निकोटिन या अन्य रासायनिक लिक्विड भरा जाता है। यह बैटरी से चलने वाला डिवाइस लिक्विड को भाप में बदलकर उपयोगकर्ता द्वारा इनहेल किया जाता है। इसे पारंपरिक सिगरेट का ‘सुरक्षित विकल्प’ बताया जाता है, लेकिन रीसर्च इसे गलत साबित करते हैं।

ई-सिगरेट में उपयोग होने वाले रासायनिक पदार्थ फेफड़ों में ‘पॉपकॉर्न लंग्स’, अस्थमा, हृदय रोग और अन्य गंभीर समस्याएं पैदा कर सकते हैं। कई अंतरराष्ट्रीय अध्ययन यह दर्शाते हैं कि ई-सिगरेट के उपयोग से मौतों की संख्या बढ़ रही है, जिसके कारण कई देशों ने इसे पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया है। भारत ने भी इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य के नजरिये से अवैध घोषित कर दिया है।

ई-सिगरेट पीने और बेचने पर क्या है सजा?

भारत सरकार ने ई-सिगरेट से जुड़ी सभी गतिविधियों जैसे उत्पादन, भंडारण, बिक्री, विज्ञापन और उपयोग पर सख्त दंड के प्रावधान किए हैं। पहली बार नियम तोड़ने पर: एक लाख रुपये तक का जुर्माना, एक साल की सजा या दोनों हो सकती हैं। दूसरी बार अपराध करने पर: पांच लाख रुपये का जुर्माना और तीन साल तक की सजा हो सकती है।

इसमें ई-हुक्का भी शामिल है। सरकार का मानना है कि कड़े दंडों के जरिए युवाओं में बढ़ते ई-सिगरेट के चलन को नियंत्रित किया जा सकता है।

Keywords: E-Cigarette Ban India, Parliament Controversy, Health Hazards Of Vaping, ICMR White Paper

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