छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों को एक और बड़ी सफलता मिली है। सोमवार सुबह, कुख्यात नक्सली कमांडर रामधेर मज्जी, जो हिडमा के बराबरी का माना जाता था, ने बकरकट्टा के कुम्ही गांव में पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया। रामधेर पर केंद्र सरकार ने 1 करोड़ रुपये का इनाम रखा था। उसके साथ 12 और नक्सलियों ने भी सरेंडर किया, जो सुरक्षा एजेंसियों के लिए नक्सलवाद को खत्म करने की दिशा में बड़ी कामयाबी है। अधिकारियों का कहना है कि यह सरेंडर अभियान छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के संयुक्त प्रयास से इन तीन राज्यों को नक्सल मुक्त बनाने में अहम कदम साबित होगा।
AK-47 से लैस कमांडरों का सरेंडर
सरेंडर करने वालों की लिस्ट यह साफ दिखाती है कि नक्सली संगठन का ऊपरी ढांचा तेजी से कमजोर हो रहा है। रामधेर मज्जी के अलावा, तीन डिविजनल वाइस कमांडर्स (DVCM) चंदू उसेंडी, ललिता, जानकी और प्रेम ने भी पुलिस के सामने हथियार डाल दिए। इनमें से दो नक्सली AK-47 और INSAS जैसे खतरनाक हथियारों से लैस थे। इसके अलावा, एरिया कमेटी मेम्बर (ACM) रामसिंह दादा और सुकेश पोट्टम ने भी सरेंडर किया, और पार्टी मेम्बर (PM) लक्ष्मी, शीला, योगिता, सागर और कविता ने नक्सलवाद छोड़ने का निर्णय लिया और आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस इन सभी से गहरी पूछताछ कर रही है, ताकि माओवादी नेटवर्क के अन्य हिस्सों को भी बेनकाब किया जा सके।
सुरक्षा बलों का तेज अभियान
सरेंडर का यह सिलसिला तब और तेज़ हो गया जब 3 दिसंबर को बीजापुर जिले में सुरक्षा बलों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 18 नक्सलियों को ढेर कर दिया। इस मुठभेड़ में डीआरजी के तीन जवान मोनू वडाड़ी, दुकारू गोंडे और रमेश सोड़ी शहीद हो गए, और कई पुलिसकर्मी घायल भी हुए। नक्सल प्रभावित इलाकों में लगातार दबाव और कड़े ऑपरेशनों के चलते माओवादी संगठन के कैडर को पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा। इस साल सुरक्षा बलों ने नक्सल गतिविधियों पर निर्णायक नियंत्रण हासिल करने के लिए ऑपरेशनों की तीव्रता को बढ़ा दिया है, जो माओवादी नेटवर्क को कमजोर करने में सहायक साबित हो रहे हैं।
2026 तक नक्सलवाद खत्म करने का लक्ष्य
केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त करने का लक्ष्य तय किया है, और इस दिशा में छत्तीसगढ़ ने अब तक शानदार प्रगति की है। अधिकारियों के मुताबिक, 2024 में अब तक 281 नक्सली मारे गए हैं, जिनमें से 252 अकेले बस्तर क्षेत्र से हैं। रायपुर रेंज के गरियाबंद जिले में 27 और मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी क्षेत्र में दो नक्सली ढेर किए गए। इस दौरान 23 सुरक्षा कर्मियों ने अपनी जान गंवाई, जो नक्सल विरोधी अभियानों के कठिनाई और खतरों को दर्शाता है। हालांकि, बाकी नक्सली कमांडरों के सरेंडर और लगातार जारी अभियानों से यह स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि सरकार का नक्सलवाद समाप्त करने का लक्ष्य अब साकार होता हुआ दिख रहा है।
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