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लोकसभा में आज ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्षों पर होगी ऐतिहासिक 10 घंटे की चर्चा, पीएम मोदी करेंगे शुरुआत

लोकसभा और राज्यसभा में इस सप्ताह ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ पर विशेष चर्चा होगी। प्रधानमंत्री मोदी, अमित शाह और कई वरिष्ठ नेता इस ऐतिहासिक अवसर पर राष्ट्रगीत की विरासत, महत्व और अनसुने पहलुओं पर बात करेंगे।

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राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ पर संसद में एक अहम और ऐतिहासिक चर्चा होने वाली है। सोमवार यानि आज लोकसभा में यह चर्चा शुरू होगी, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोपहर 12 बजे अपना संबोधन देंगे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इस चर्चा के अंत में अपने विचार साझा करेंगे। इस बहस के लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया गया है, जिसमें से 3 घंटे एनडीए सरकार को दिए गए हैं। राज्यसभा में यह चर्चा 9 दिसंबर को होगी, और गृह मंत्री अमित शाह इसे शुरू करेंगे। यह कार्यक्रम ‘वंदे मातरम्’ की महत्ता को समझने और इसके राष्ट्र के प्रति योगदान को उजागर करने के लिए है।

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विपक्ष की भागीदारी और संसदीय गतिविधियां

इस ऐतिहासिक चर्चा में विपक्ष भी सक्रिय रूप से भाग लेगा। कांग्रेस पार्टी के आठ प्रमुख नेता गौरव गोगोई, प्रियंका गांधी वाड्रा, दीपेंद्र हुड्डा, बिमोल एकोइजाम, प्रणति शिंदे, प्रशांत पाडोले, चामाला रेड्डी और ज्योत्सना महंत, लोकसभा में अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। यह सत्र संसद के शीतकालीन सत्र का हिस्सा है, जो 1 दिसंबर से शुरू होकर 19 दिसंबर तक चलेगा। 18वीं लोकसभा का यह छठा सत्र और राज्यसभा का 269वां सत्र है, जिसमें राष्ट्रीय महत्व के कई विधायी कार्यों के साथ ऐतिहासिक मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी।

‘वंदे मातरम्’: रचना से राष्ट्रगीत तक की यात्रा

‘वंदे मातरम्’ सिर्फ एक राष्ट्रगीत नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम का एक गहरा भावनात्मक आधार भी रहा है। यह रचना 7 नवंबर 1875 को बंगाली साहित्यिक पत्रिका बंगदर्शन में पहली बार प्रकाशित हुई थी, जिसे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखा था। बाद में इसे उनके प्रसिद्ध उपन्यास आनंदमठ (1882) में शामिल किया गया। इस गीत को संगीतबद्ध करने का कार्य गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने किया, जिससे यह पूरे देश में फैल गया। “मां, तुझे प्रणाम” की भावना से भरा यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान क्रांति और एकता का प्रतीक बन गया। समय के साथ, यह राष्ट्र की सांस्कृतिक, राजनीतिक और आध्यात्मिक चेतना का अभिन्न हिस्सा बन चुका है।

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विरासत का उत्सव

इस वर्ष 7 नवंबर को ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ धूमधाम से मनाई गई, जिसे राष्ट्रीय स्तर पर विशेष कार्यक्रमों के माध्यम से सम्मानित किया गया। संसद में आयोजित होने वाली यह चर्चा इस रचना के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और वैचारिक महत्व को एक नए दृष्टिकोण से समझने का अद्भुत अवसर प्रदान करेगी। ‘वंदे मातरम्’ की यह विरासत न केवल इतिहास की याद दिलाती है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्र के प्रति गहरे भावनात्मक संबंध और सांस्कृतिक गौरव को समझाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है।

Keywords: Vande Mataram 150th anniversary, Lok Sabha discussion, Rajya Sabha debate, Bankim Chandra Chatterjee, Indian Parliament

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