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पिंपरी चिंचवड का चुनाव में फिर दिखेगा पवार परिवार का पावर, बीजेपी को छोड़ भतीजे ने थामा चाचा का हाथ

पुणे नगर निगम चुनाव से पहले शरद पवार और अजित पवार के गुट एक बार फिर साथ मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला कर चुके हैं।

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पुणे नगर निगम चुनाव से पहले शरद पवार और अजित पवार के गुट एक बार फिर साथ मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला कर चुके हैं। इस चुनाव में चाचा–भतीजे की जोड़ी कितना कमाल दिखा पाएगी, इसका जवाब तो नतीजों के बाद ही मिलेगा, लेकिन दोनों का एक साथ आना महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत जरूर माना जा रहा है।

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गौरतलब है कि अजित पवार ने पहले शरद पवार का साथ छोड़कर अलग राजनीतिक राह चुन ली थी। फिलहाल एनसीपी का चुनाव चिन्ह ‘घड़ी’ अजित पवार गुट के पास है, जबकि शरद पवार का दल अलग होकर एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के नाम से राजनीति कर रहा है।

चाचा–भतीजे के साथ आने की वजह

पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम चुनाव को लेकर अजित पवार ने रविवार को बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि अब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) और एनसीपी (शरदचंद्र पवार) एक साथ चुनाव लड़ेंगी। एक सभा को संबोधित करते हुए अजित पवार ने आरोप लगाया कि भाजपा ने कई चुनावों में एनसीपी की अनदेखी की। यहां तक कि आगामी बीएमसी चुनाव में भी उनकी पार्टी को गठबंधन से बाहर रखा गया। इसके बाद यह फैसला लिया गया कि दोनों एनसीपी गुट अपने-अपने चुनाव चिन्ह पर मिलकर चुनाव लड़ेंगे। अजित पवार ने साफ तौर पर कहा कि उनका सीधा मुकाबला भाजपा से है।

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‘तुतारी’ और ‘घड़ी’ साथ आने के मायने

इसके बाद सत्ता के गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या शरद पवार की पार्टी का चिन्ह ‘तुतारी’ और अजित पवार की एनसीपी का चिन्ह ‘घड़ी’ एक साथ आने से लंबे समय से चला आ रहा विवाद खत्म होने की ओर है। बताया जा रहा है कि बीते कई दिनों से दोनों दलों के नेताओं के बीच बातचीत चल रही थी। ऐसे में भाजपा पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए चाचा–भतीजे का फिर से एक होना राजनीति में एक बड़े बदलाव की ओर इशारा करता है।

साल 2023 में हुआ था एनसीपी का विभाजन

यह गठबंधन 2023 में एनसीपी के विभाजन के बाद पहली बार है, जब पार्टी के दोनों गुट एक मंच पर साथ नजर आए हैं। साल 2023 में अजित पवार अपने चाचा शरद पवार से अलग होकर भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के साथ महायुति गठबंधन में शामिल हो गए थे। उस समय उन्होंने शरद पवार की उम्र का हवाला देते हुए पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाए थे।

शरद पवार चार बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और राज्य की राजनीति में उनका कद बेहद मजबूत माना जाता है। हाल ही में बारामती में पवार परिवार एक साथ नजर आया, जब उद्योगपति गौतम अडानी ने शरदचंद्र पवार सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उद्घाटन किया। इस कार्यक्रम को भी राजनीतिक संकेतों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

यह गठबंधन भले ही स्थानीय स्तर का हो, लेकिन इसके राजनीतिक मायने बड़े हैं, क्योंकि राज्य स्तर पर दोनों एनसीपी गुट फिलहाल अलग-अलग गठबंधनों का हिस्सा हैं। खासतौर पर पिंपरी-चिंचवड़, जो लंबे समय तक एनसीपी का पारंपरिक गढ़ रहा है और जहां 2017 तक अविभाजित एनसीपी का शासन था, वहां इस एकजुटता को बेहद अहम माना जा रहा है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कदम वोटों के बंटवारे को रोकने और भाजपा के खिलाफ मजबूत चुनौती खड़ी करने की रणनीति हो सकता है। आने वाले दिनों में इसका असर महाराष्ट्र की राजनीति पर साफ दिखाई दे सकता है।

Keywords: Ajit Pawar, Sharad Pawar, Pawar Family, NCP Alliance NCP, Pimpri Chinchwad Civic Polls, PCMC Elections

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