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SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- गड़बड़ी मिली तो पूरी प्रक्रिया होगी रद्द

बिहार चुनाव से पहले SIR का मुद्दा लगातार गर्माया हुआ है। राजनीतिक पार्टियों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच सुप्रीम कोर्ट ने SIR मामले में सुनवाई के दौरान सख्त टिप्पणी की।

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बिहार चुनाव से पहले विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का मुद्दा गर्माया हुआ है। सभी राजनीतिक पार्टियां लगातार इसे लेकर आरोप-प्रत्यारोप लगा रही हैं। इस बीच आज सुप्रीम कोर्ट ने SIR मामले में सुनवाई के दौरान सख्त टिप्पणी की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा यदि चुनाव आयोग (ECI) की तरफ से अपनाई गई प्रक्रिया में कोई अवैधता या अनियमितता पाई जाती है, तो पूरी प्रक्रिया को रद्द कर दिया जाएगा।

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गड़बड़ी मिली तो पूरी SIR प्रक्रिया रद्द

न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि कोर्ट यह मानकर चल रहा है कि संवैधानिक संस्था होने के नाते निर्वाचन आयोग ने नियमों का पालन किया है। लेकिन यदि कोई गड़बड़ी सामने आती है, तो न्यायिक हस्तक्षेप भी होगा।

‘आधार वैध दस्तावेज, लेकिन नागरिकता का सबूत नहीं’

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया है कि आधार कार्ड को पहचान और निवास का वैध दस्तावेज माना जाएगा, हालांकि यह नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जाएगा। बावजूद इसके, शिकायतें मिल रही हैं कि अधिकारी आधार को दस्तावेज के रूप में स्वीकार नहीं कर रहे हैं।

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वोटर लिस्ट से 65 लाख नाम हटाने का आरोप

बिहार में जारी SIR प्रक्रिया के तहत 18 अगस्त को जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 65 लाख नाम हटाए जाने की पुष्टि हुई है। इस पर विपक्षी दलों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग बीजेपी को फायदा पहुंचाने के लिए मतदाता सूची में हेरफेर कर रहा है।

विपक्ष मतदाताओं को कर रहा गुमराह- EC

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने राहुल गांधी से कहा है कि यदि उनके पास वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के सबूत हैं, तो वह हलफनामा दायर करें, अन्यथा सार्वजनिक रुप से माफी मांगें। इस दौरान आयोग ने विपक्ष पर मतदाताओं को गुमराह करने का आरोप लगाया है। साथ ही मतदाताओं से गुमराह ना होने की अपील की।

7 अक्टूबर को अगली सुनवाई

इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने बिहार SIR पर कोई आंशिक राय देने से इनकार करते हुए ये स्पष्ट किया कि उसका अंतिम फैसला पूरे भारत में प्रभावी होगा। इस मामले की अंतिम बहस 7 अक्टूबर 2025 को होगी, जिससे चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बड़ा असर पड़ सकता है। गौरतलब है कि इससे पहेल सुनावाई के दौरान कोर्ट ने 8 सितंबर को निर्देश दिया था कि बिहार में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए आधार को 12वें वैध दस्तावेज के रूप में माना जाएगा।

Keywords:Bihar Voter List 2025,Special Intensive Revision (SIR), Supreme Court Order Voter List, Aadhar Card Voter ID, Names removed from voter list in Bihar, Election Commission dispute, Rahul Gandhi vs ECI

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