केरल हाईकोर्ट ने सबरीमाला में हुई कथित सोना चोरी मामले में मौजूदा साक्ष्यों का हवाला देते हुए यह निष्कर्ष निकाला है कि इसके तार स्पष्ट रूप से एक ‘बड़ी साजिश’ से जुड़े हुए हैं। कोर्ट ने विशेष जांच दल (SIT) को इस दिशा में गहन जांच करने का निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट ने इसी महीने की शुरुआत में इस मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था और उसे जांच पूरी करने के लिए छह हफ्ते का समय दिया था, साथ ही प्रगति रिपोर्ट से कोर्ट को अवगत कराने का निर्देश भी दिया था।
बंद कमरे में हुई पूछताछ
मंगलवार को SIT प्रमुख बंद कमरे में अदालत में पेश हुए, जहां उनसे जांच की प्रगति के बारे में पूछा गया। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के अनुसार, साक्ष्यों से पता चलता है कि सोने की चोरी के पीछे वास्तव में एक योजनाबद्ध साजिश थी। कोर्ट ने कथित तौर पर इस निष्कर्ष के बावजूद जांच को आगे न बढ़ाए जाने पर सवाल उठाया। SIT ने पुष्टि की है कि सबरीमाला में सोने की चोरी योजना के अनुसार ही की गई थी।
योजना के अनुसार हुई चोरी
जांच प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, आरोपियों ने चढ़ावे में आए सोने, जिसमें विजय माल्या द्वारा 1998 में प्रदान की गई द्वारपालक मूर्तियां भी शामिल थीं, की गणना के आधार पर चोरी की योजना सावधानीपूर्वक बनाई थी। कथित तौर पर उनका मानना था कि सोने की जगह रंगी हुई प्रतिकृतियां लगाने से चोरी की पहचान नहीं हो पाएगी।
SIT ने इस मामले में 2 अलग-अलग FIR दर्ज की हैं और अब तक 10 लोगों को आरोपी बनाया है, जिनमें उन्नीकृष्णन पोट्टी मुख्य प्रायोजक हैं। SIT ने अदालत को बताया कि उन्नीकृष्णन पोट्टी को गिरफ्तार कर लिया गया है और आगे भी गिरफ्तारियां होने की उम्मीद है।
मुख्य संदिग्धों से पूछताछ
उन्नीकृष्णन पोट्टी के दोस्त अनंत सुब्रमण्यम से सोमवार देर रात 10 घंटे से अधिक पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ दिया गया है और जरूरत पड़ने पर उन्हें फिर से पेश होने का नोटिस दिया गया है। 2019 में, सुब्रमण्यम ने कथित तौर पर सोने से मढ़ी द्वारपालक मूर्तियों को सबरीमाला से बेंगलुरु पहुंचाया था।
जांचकर्ता नागेश और कल्पेश समेत अन्य संदिग्धों को भी आरोपी बनाने की कोशिश कर रहे हैं। SIT अब बोर्ड के उन 2 अधिकारियों को तलब करने की तैयारी में है जिनका नाम आरोपियों की सूची में आने के बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 15 नवंबर को निर्धारित की गई है।
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