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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ पद से हटाने का नोटिस लाने की तैयारी में विपक्ष… क्या है चुनाव आयुक्त को हटाने के प्रावधान?

विपक्ष भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लेकर आने की तैयारी में है। ऐसा करने के लिए संविधान में क्या है नियम, किन हालातों में CEC को हटाया जा सकता है?

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विपक्ष भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लेकर आने की तैयारी में है। ऐसा करने के लिए संविधान में क्या है नियम, किन हालातों में CEC को हटाया जा सकता है?

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भारत के चुनाव आयोग और कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्ष में तनाव बढ़ता जा रहा है। इस बीच जानकारी सामने आई है कि विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ पद से हटाने का नोटिस लाने पर विचार कर रहा है। यह चौंकाने वाला कदम विपक्ष के नेता राहुल गांधी की तरफ से चुनाव आयोग के कामकाज में बड़े पैमाने पर खामियों और ‘वोट चोरी’ के आरोपों के बाद उठाया जा सकता है। बिहार में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के बाद तनातनी ज्यादा बढ़ गई है।

विपक्ष महाभियोग प्रस्ताव लेकर आता है तो क्या चुनाव आयुक्त को पद से हटाया जा सकता है,क्या है इसके प्रावधान,देश के निर्वाचन आयोग के आयुक्त को लेकर क्या है नियम आइए जानते हैं|

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CEC को हटाने के क्या प्रावधान?

सबसे पहले यह समझना ज़रूरी है कि मुख्य चुनाव आयुक्त का पद एक बड़ी संवैधानिक अथॉरिटी है जिस पर भारत में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की अहम ज़िम्मेदारी होती है। इस पद की स्वतंत्रता और स्वायत्तता की रक्षा भारतीय लोकतंत्र के लिए बेहद जरूरी है।यही वजह है कि भारत के संविधान में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए काफी जटिल प्रावधान हैं, जो सुप्रीम कोर्ट के जज को पद से हटाने की तरह हैं।

मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने से संबंधित प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 324(5) में दिए गए हैं। संविधान के अनुच्छेद 324(5) में कहा गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से उसी तरह और उसी आधार पर हटाया जा सकता है, जिस तरह सुप्रीम कोर्ट के जज को पद से हटाया जाता है।

नतीजन, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया को समझने के लिए, सर्वोच्च न्यायालय के जज को हटाने के संवैधानिक और वैधानिक ढांचे को समझना जरूरी है।

SC के जजों को कैसे हटाया जाता है?

सर्वोच्च न्यायालय के जज को हटाने की प्रक्रिया, जो सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त पर लागू होती है, भारत के संविधान के अनुच्छेद 124(4) में दर्ज है और न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के तहत आती है।

संविधान के अनुच्छेद 124(4) में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के किसी भी जज को उनके पद से तब तक नहीं हटाया जा सकता, जब तक कि राष्ट्रपति का कोई आदेश न हो। यह आदेश तभी पारित हो सकता है, जब संसद के दोनों सदन (लोकसभा और राज्यसभा) एक ही सत्र में जज को हटाने के लिए एक प्रस्ताव पास करें।

यह प्रस्ताव ‘सिद्ध दुर्व्यवहार’ या ‘अक्षमता’ के आधार पर पारित होना चाहिए. इसे पास करने के लिए दोनों सदनों में ‘विशेष बहुमत’ की जरूरत होती है। इसका मतलब है कि सदन की कुल सदस्यता का बहुमत और साथ ही उस सदन में उपस्थित और वोट डालने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई सदस्यों का बहुमत होना चाहिए।

Keywords: Constitution Protect CEC, CEC Removal Notification, Election Commission of India, ECI And Congress, SIR, Bihar SIR, Voter Identity

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