छठ महापर्व के करीब आते ही देशभर में भक्ति और खुशियों का माहौल बन गया है। बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश से शुरू होकर यह पर्व अब पूरे भारत और विदेशों में मनाया जाता है। इसी भावना को और बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक संदेश साझा किया। उन्होंने लिखा कि छठ महापर्व प्रकृति और संस्कृति को समर्पित है। देशभर के श्रद्धालु भक्ति भाव से इसकी तैयारियों में जुटे हैं। छठी मइया के गीत इस पर्व की भव्यता और पवित्रता को बढ़ाते हैं। उन्होंने लोगों से अनुरोध किया कि वे छठ पूजा से जुड़े गीत उनके साथ शेयर करें।
लोकगीतों से महकेगी डिजिटल दुनिया
छठ पूजा के गीत बिहार और पूर्वी भारत की लोक-संस्कृति की आत्मा माने जाते हैं। पीढ़ियों से महिलाएं घाटों पर पारंपरिक गीत गाकर सूर्य देव और छठी मइया की आराधना करती हैं। पीएम मोदी की इस अपील के बाद सोशल मीडिया पर छठ के गीतों की एक नई लहर उठ खड़ी हुई है। लोग अपने पसंदीदा पारंपरिक और आधुनिक छठ गीतों को प्रधानमंत्री के एक्स हैंडल पर टैग कर रहे हैं। यह पहल न केवल लोक संगीत को नया मंच दे रही है, बल्कि नई पीढ़ी को भी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ रही है।
प्रकृति और संस्कृति को समर्पित महापर्व छठ आने वाला है। बिहार सहित देशभर में इसकी तैयारियों में श्रद्धालु पूरे भक्ति-भाव से जुट चुके हैं। छठी मइया के गीत इस पावन अवसर की भव्यता और दिव्यता को और बढ़ाने वाले होते हैं। आपसे आग्रह है कि आप भी छठ पूजा से जुड़े गीत मेरे साथ शेयर करें।…
— Narendra Modi (@narendramodi) October 24, 2025
नहाय-खाय से पहले बढ़ा उत्साह
पीएम मोदी का यह संदेश ऐसे समय में आया है जब छठ पर्व का पहला चरण ‘नहाय-खाय’ शुरू होने वाला है। इस दिन श्रद्धालु स्नान करके शुद्ध आहार ग्रहण करते हैं और छठ व्रत की पवित्र शुरुआत होती है। बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के घरों में सफाई और तैयारियों का माहौल है। घाटों की सजावट, मिट्टी के दीये, केले के पेड़ और अर्घ्य के सामान बाजारों में नजर आ रहे हैं। ऐसे समय में प्रधानमंत्री की अपील ने इस पर्व की भावनात्मक गहराई और बढ़ा दी है।
एकता और संस्कृति का प्रतीक बनता छठ
छठ महापर्व सिर्फ धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की एकता का जीवंत उदाहरण है। इस पर्व में प्रकृति, परिवार और परंपरा तीनों का सुंदर मेल देखने को मिलता है। पीएम मोदी द्वारा छठी मइया के गीत साझा करने का अभियान इस विविधता में एकता के संदेश को और मजबूत कर रहा है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए यह पहल लोक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का अवसर बन गई है। जैसे-जैसे लोग अपने-अपने क्षेत्रीय गीत साझा कर रहे हैं, वैसे-वैसे भारत की सांस्कृतिक धारा एक सुर में गूंज उठी है।
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