संसद के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन ही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर विपक्ष हंगामे के मूड में दिखा। विपक्ष के रुख के खुलकर सामने आने के बाद हंगामा बढ़ गया, जिसके कारण लोकसभा की कार्यवाही में बार-बार बाधा आई। दूसरी तरफ राज्यसभा में भी विपक्ष के वॉकआउट के बाद ज़ीरो ऑवर और स्पेशल मेंशन की कार्यवाही चली। इसके बाद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने SIR को लेकर सदन में जारी हंगामे को दूर करने के लिए सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर फ्लोर लीडर्स के साथ बैठक की। इसके बाद के फैसले पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
SIR पर चर्चा की मांग पर अड़ा विपक्ष
राज्यसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन पर तुरंत चर्चा की मांग रखते हुए कहा कि यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है, इसलिए इस पर तुरंत चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि समस्या यह है कि सरकार कहती है समय बताइए। खड़गे ने आगे कहा कि हर मुद्दा अपने स्थान पर महत्वपूर्ण है, लेकिन मुद्दों को हथियार बनाकर संसद में गतिरोध पैदा करना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि चुनाव में जीत-हार होती रहती है, लेकिन उस हार का गुस्सा संसद में निकालना उचित नहीं है। हम किसी भी मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार हैं। मैं विपक्षी सांसदों से अपील करता हूं कि वे सदन की कार्यवाही में रुकावट न डालें।
राजद सांसद मनोज कुमार झा ने कहा, “मैं किरेन रिजिजू से पूछना चाहता हूं कि पिछले सत्र में क्या हुआ था। पहले भी SIR हुआ था। क्या वह कभी हेडलाइन बना? अब यह इतना बड़ा मुद्दा क्यों बन गया है? सवाल नीति और नीयत का है। जिन बातों से लोकतंत्र की जड़ें तय होती हैं, यदि उन पर बहस करवाने में भी इतना किंतु-परंतु हो, तो किरेन जी सोचिए कि लोगों का भरोसा कैसे बचेगा? सहमत हो जाइए।”
राज्यसभा स्थगित
SIR पर चर्चा की मांग को लेकर विपक्षी सांसदों के नारेबाजी करने के बाद राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी गई। बीजेपी नेता शिवराज सिंह चौहान ने कहा, “SIR पर जवाब तो बिहार की जनता पहले ही दे चुकी है। क्या विपक्ष और कांग्रेस घुसपैठियों को बचाना चाहती है?… इन्हें जनता के मुद्दों से कोई सरोकार नहीं रहा। आज किसानों और गांवों के मुद्दों पर चर्चा होनी थी। अगर दम है तो चर्चा करो और सरकार को घेरो। विपक्ष के पास न दिशा है, न ही मुद्दे।”
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