राजस्थान सरकार ने स्थानीय निकाय चुनावों के लिए एक पुराने और अहम नियम को खत्म कर दिया है। अब राज्य में जिन लोगों के दो से ज्यादा बच्चे हैं, वे भी नगर निकाय और पंचायत चुनाव लड़ सकते हैं। पहले तक, अगर किसी के दो से ज्यादा संतान होती, तो वो चुनाव में उम्मीदवार नहीं बन सकता था। हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में इस रोक को हटाने का फैसला हुआ। सरकार ने कहा है कि विधानसभा के मौजूदा सत्र में इस बदलाव के लिए विधेयक लाया जाएगा, जिससे ये फैसला कानून का रूप ले लेगा।
कानून मंत्री जोगाराम पटेल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ कहा कि सरकार का मकसद लोकतांत्रिक भागीदारी बढ़ाना है। उनके मुताबिक, वक्त के साथ समाज और अर्थव्यवस्था, दोनों में काफी बदलाव आए हैं, इसलिए पुराने प्रावधानों की फिर से जांच जरूरी थी। उनका मानना है कि ये फैसला खासकर ग्रामीण और छोटे शहरों में चुनावी समीकरण बदल सकता है।
विचारधारा के आरोपों पर सरकार का पक्ष
कैबिनेट मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने इस फैसले पर उठ रहे सवालों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि इस फैसले को किसी खास विचारधारा से जोड़ना गलत है। उन्होंने साफ किया कि न तो ये फैसला आरएसएस से प्रेरित है और न ही किसी दबाव की वजह से लिया गया है। राठौड़ ने ये भी जोड़ा कि आज के दौर में लोग ज्यादा जागरूक हैं, परिवार नियोजन को लेकर सोच बदल चुकी है। उनके हिसाब से अगर कोई व्यक्ति आर्थिक रूप से सक्षम है और बच्चों की जिम्मेदारी अच्छे से उठा सकता है, तो उसे चुनाव लड़ने से रोकना सही नहीं है। उन्होंने कहा, लोकतंत्र में जितना ज्यादा लोगों की भागीदारी होगी, उतना ही अच्छा है।
कांग्रेस का विरोध और राजनीतिक प्रतिक्रिया
सरकार के इस फैसले पर विपक्ष खासा नाराज है। कांग्रेस ने सीधे आरोप लगाया कि सरकार एक खास वैचारिक एजेंडे पर काम कर रही है। कांग्रेस नेताओं ने कहा, परिवार नियोजन को बढ़ावा देने के लिए यह नियम लागू किया गया था, और अब उसे हटाने से जनसंख्या नियंत्रण के प्रयास कमजोर होंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले चुनावों में चर्चा का बड़ा कारण बनेगा। सरकार जहां इसे जनता के अधिकारों के विस्तार के तौर पर देख रही है, वहीं विपक्ष इसे नीति के स्तर पर पीछे हटना मान रहा है। आने वाले वक्त में इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी और तेज होने की पूरी संभावना है।
कैबिनेट के दूसरे अहम फैसले
कैबिनेट की बैठक में सिर्फ चुनावी पात्रता नहीं, कई और बड़े फैसले भी लिए गए। बजट 2024-25 के तहत राजस्थान आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा विश्वविद्यालय विधेयक-2026 के ड्राफ्ट को मंजूरी मिली, जिससे अजमेर में इन क्षेत्रों की शिक्षा को नई मजबूती मिलेगी। साथ ही, राज्य में औद्योगिक निवेश बढ़ाने के लिए ‘राजस्थान औद्योगिक पार्क प्रोत्साहन नीति-2026’ के मसौदे को भी हरी झंडी मिल गई।
ग्राम विकास अधिकारी संवर्ग में प्रमोशन के मौके बढ़ाने के लिए वरिष्ठ ग्राम विकास अधिकारी के नए पद बनाए जाएंगे। अपराध नियंत्रण को मजबूत करने के लिए राजस्व आसूचना और आर्थिक अपराध निदेशालय के गठन पर भी सहमति बनी। ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में, तीन जिलों में चार सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए जमीन आवंटित करने का फैसला हुआ।
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