भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस बी आर गवई ने अपने उत्तराधिकारी के तौर पर जस्टिस सूर्यकांत का नाम कानून मंत्रालय को भेज दिया है। कानून मंत्रालय ने हाल ही में जस्टिस गवई से अगले CJI के नाम की सिफारिश मांगी थी।
वर्तमान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बी आर गवई 23 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं। उनकी सेवानिवृत्ति के बाद, जस्टिस सूर्यकांत 24 नवंबर को देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ लेंगे।
जस्टिस सूर्यकांत का कार्यकाल लगभग 14 महीने का होगा, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष है।
मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की प्रक्रिया
CJI की नियुक्ति एक स्थापित प्रक्रिया ज्ञापन (MoP) के तहत की जाती है-
• वरिष्ठता का सिद्धांत
सामान्य तौर पर, भारत के मुख्य न्यायाधीश के पद पर नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश की होनी चाहिए, बशर्ते उन्हें पद धारण करने के लिए उपयुक्त माना जाए।
• समय सीमा
परंपरागत रूप से, यह पत्र वर्तमान मुख्य न्यायाधीश के 65 वर्ष की आयु पूरी कर सेवानिवृत्त होने से एक महीने पहले भेजा जाता है।
कौन हैं जस्टिस सूर्यकांत?
जस्टिस सूर्यकांत न्यायपालिका में 2 दशकों से अधिक का अनुभव रखते हैं।
उनका जन्म 10 फरवरी, 1962 को हरियाणा के हिसार जिले में हुआ था। वह 24 मई, 2019 को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बने।
जस्टिस सूर्यकांत के ऐतिहासिक फैसले
जस्टिस सूर्यकांत देश के सर्वोच्च न्यायिक पद पर अपने साथ कई ऐतिहासिक फैसले लाने वाले न्यायाधीशों में से एक हैं। वह उन पीठों का हिस्सा रहे हैं जिन्होंने-
- अनुच्छेद 370 को निरस्त करने से संबंधित मामलों पर फैसला सुनाया।
- अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, लोकतंत्र, भ्रष्टाचार, पर्यावरण और लैंगिक समानता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर निर्णय दिए।
- उन्होंने औपनिवेशिक काल के राजद्रोह कानून को स्थगित रखने वाली पीठ का भी हिस्सा थे, जिसने यह निर्देश दिया था कि सरकार द्वारा समीक्षा पूरी होने तक इस कानून के तहत कोई नई प्राथमिकी दर्ज न की जाए।
अब देखना यह होगा कि जस्टिस सूर्यकांत की नियुक्ति न्यायपालिका में निरंतरता और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के प्रति देश की प्रतिबद्धता को कितना मजबूत करेगी?
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