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अमेरिकी संसद में मोदी-पुतिन के सेल्फी की चर्चा, अपने ही देश में घिरे ट्रंप

अमेरिकी प्रतिनिधि सिडनी कामलागर-डोव ने ट्रंप की भारत नीति पर निशाना साधते हुए चेतावनी दी कि उनकी रणनीति भारत-अमेरिका संबंधों को कमजोर कर सकती है और वैश्विक संतुलन बदल सकती है।

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प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की हाल ही में भारत यात्रा के दौरान ली गई तस्वीर को लेकर अमेरिकी प्रतिनिधि सिडनी कामलागर-डोव ने ट्रंप की नीतियों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि ट्रंप की भारत के प्रति नीतियां देश को नुकसान पहुंचा सकती हैं। डोव ने चेतावनी दी कि जब आप अपने साझेदारों पर दबाव डालते हैं, तो उसकी कीमत चुकानी पड़ती है। उन्होंने कहा, मोदी और पुतिन की तस्वीर यह दिखाती है कि भारत को अमेरिका से दूर किया जा रहा है। डोव ने ट्रंप से कहा कि अपने साझेदारों को दुश्मनों की ओर धकेलने से शांति पुरस्कार नहीं मिलता।

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‘ट्रंप ने भारत-अमेरिका साझेदारी को नुकसान पहुंचाया’

सुनवाई के दौरान सिडनी कामलागर-डोव ने कहा कि बाइडेन प्रशासन ने ट्रंप को एक मजबूत भारत-अमेरिका साझेदारी दी थी, लेकिन ट्रंप ने अपनी व्यक्तिगत नाराज़गी और छोटे राजनीतिक फायदों के लिए इस पर चोट की। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप का उद्देश्य देश का हित नहीं, बल्कि अपना निजी स्वार्थ था, खासकर नोबेल शांति पुरस्कार की चाहत थी। डोव ने यह भी कहा कि अगर ट्रंप अपनी नीति नहीं बदलते, तो वे वह राष्ट्रपति बन जाएंगे जिन्होंने भारत को अमेरिका से दूर कर दिया।

टैरिफ पर बोली सांसद

सिडनी कामलागर-डोव ने कहा कि भारत पर 50% टैरिफ लगाना, जो किसी भी देश पर लगाए गए सबसे ऊंचे टैरिफ में से एक है, इस नीति ने भारत और अमेरिका के बीच उच्च-स्तरीय बैठकों को प्रभावी रूप से बाधित कर दिया। इसके बावजूद, भारत से रूसी तेल के आयात पर 25% टैरिफ लगाना एकदम निरर्थक लगता है, खासकर जब स्टीव विटकॉफ जैसे लोग, कुछ व्यावसायिक निवेश के बदले, पुतिन के सलाहकारों के साथ पर्दे के पीछे सौदे कर रहे हों।

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एच-1बी वीजा निति पर किया हमला

सिडनी कामलागर-डोव ने ट्रंप की नीतियों पर हमला करते हुए कहा कि टैरिफ के अलावा, ट्रंप ने अमेरिका और भारत के बीच लोगों के आपसी संबंधों को भी नुकसान पहुंचाया है। विशेष रूप से, एच-1बी वीजा पर लगाए गए 100,000 डॉलर के शुल्क को आलोचना का विषय बनाया, जिसका 70% हिस्सा भारतीयों के पास है। डोव के अनुसार, यह शुल्क अमेरिका में भारतीयों के विज्ञान, प्रौद्योगिकी, चिकित्सा और कला के क्षेत्रों में किए गए अद्वितीय योगदान का अपमान है। ये टिप्पणियां हाउस फॉरेन अफेयर्स साउथ एंड सेंट्रल एशिया की सुनवाई में की गईं, जिसका शीर्षक था “अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी: एक स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक को सुरक्षित करना”।

रणनीतिक साझेदारी को लेकर बढ़ती चिंता

सिडनी कामलागर-डोव ने चेतावनी दी कि अगर भारत और अमेरिका के बीच विश्वास बहाल करने के लिए तुरंत कदम नहीं उठाए गए, तो अमेरिकी रणनीति का “स्वतंत्र और खुला हिंद-प्रशांत क्षेत्र” कमजोर हो सकता है। उन्होंने कहा कि अगर भारत को खो दिया गया, तो एशिया में अमेरिका की प्रभावशीलता घट जाएगी, जिससे चीन और रूस को फायदा हो सकता है। डोव ने प्रशासन से अपील की कि वह भारत-अमेरिका संबंधों में आई दरार को जल्दी से ठीक करने की कोशिश करे, क्योंकि यह साझेदारी न सिर्फ आर्थिक, बल्कि सुरक्षा और वैश्विक नेतृत्व के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण है।

Keywords: India-US relations, Sydney Kamlager-Dove, tariffs on India, H-1B visa fee, Modi-Putin meeting, US foreign policy

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