मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका–इज़रायल के बीच जारी युद्ध को आज 13 दिन हो चुके हैं। दिन-ब-दिन यह लड़ाई और तेज होती जा रही है। दोनों तरफ से एक-दूसरे पर मिसाइल, बम और गोले-बारूद से हमले किए जा रहे हैं। इस बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने इस संघर्ष को खत्म करने के लिए तीन अहम शर्तें रखी हैं।
در تماس با روسای دولتهای روسیه و پاکستان ضمن اعلام التزام جمهوری اسلامی به صلح و آرامش در منطقه، تاکید کردم تنها راه پایان جنگی که با آتشافروزی رژیم صهیونیستی و آمریکا آغاز شده پذیرش حقوق مسلم ایران، پرداخت غرامت و الزام قاطع بینالمللی به عدم تجاوز مجدد آنان است. https://t.co/T48UzJf3M6
— Masoud Pezeshkian (@drpezeshkian) March 11, 2026
इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई के बेटे के सुप्रीम लीडर बने रहने और ईरान के साथ जारी संघर्ष में संभावित जीत के ऐलान को लेकर पूछे गए सवाल पर सीधी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
उन्होंने कहा कि वह इस विषय पर कुछ कहना नहीं चाहते। हालांकि ट्रंप ने बताया कि उन्होंने हाल ही में कई देशों के नेताओं से बातचीत की है और सभी ने मौजूदा हालात को असाधारण बताया है। उन्होंने यह भी कहा कि अपने पहले कार्यकाल के दौरान उन्होंने अमेरिका की सैन्य क्षमताओं को काफी मजबूत किया था और आज अमेरिका के पास दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना है, जिसकी बराबरी कोई नहीं कर सकता।
ईरान ने रखीं ये तीन शर्तें
- ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने कहा कि उन्होंने रूस और पाकिस्तान के नेताओं से बातचीत की है।
- बातचीत के दौरान उन्होंने मध्य-पूर्व में शांति बनाए रखने के लिए ईरान की प्रतिबद्धता दोहराई।
- उनका कहना है कि मौजूदा युद्ध की शुरुआत इज़रायल और अमेरिका की कार्रवाई से हुई है।
- उन्होंने कहा कि इस युद्ध को खत्म करने का एकमात्र रास्ता ईरान के वैध अधिकारों को मान्यता देना है।
- साथ ही उन्होंने युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई (मुआवजा) की भी मांग की है।
- पेज़ेशकियन ने कहा कि भविष्य में किसी भी तरह के हमले को रोकने के लिए मजबूत अंतरराष्ट्रीय गारंटी भी जरूरी है।
ईरान ने दी भारत को बड़ी राहत
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच बातचीत हुई है। इस दौरान भारतीय तेल टैंकरों को रणनीतिक रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने को लेकर चर्चा की गई। अच्छी बात यह रही कि बातचीत सकारात्मक रही और भारतीय जहाजों को नहीं रोका जाएगा।
ईरान ने साफ कहा है कि अमेरिका और इज़रायल के जहाजों को वहां से गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी और उन पर प्रतिबंध जारी रहेगा। इसके अलावा लाइबेरियाई झंडे वाले जहाज अरब क्षेत्र से मुंबई तक आ सकेंगे। इसे भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत माना जा रहा है।
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