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अंतरिक्ष में इतिहास रचने के बेहद करीब भारत, गगनयान के दूसरे ड्रोग पैराशूट टेस्ट में ISRO को मिली सफलता

भारत जल्द ही उन देशों में शामिल होगा जो इंसानों को अंतरिक्ष में भेजकर सुरक्षित वापस ला सकते हैं। हर सफल टेस्ट देश की तकनीक को मजबूत करता है और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम साबित हो रहा है।

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अंतरिक्ष यात्रा जितनी थ्रिलिंग लगती है, उससे कहीं ज्यादा चैलेंजिंग उसकी सुरक्षित वापसी होती है। यही कारण है कि भारत अपने महत्वाकांक्षी गगनयान मिशन के हर चरण को बेहद सावधानी से परख रहा है। हाल ही में ISRO ने दूसरा इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा किया, जो इस दिशा में बड़ी उपलब्धि है। यह उपलब्धि बताती है कि भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी अब सपना नहीं बल्कि हकीकत के और करीब है, और देश की तकनीकी क्षमता लगातार मजबूत होती जा रही है।

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गगनयान की सफलता पर ISRO को मिली सराहना

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस उपलब्धि पर ISRO की टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सफलता लंबे समय की मेहनत का नतीजा है और गगनयान मिशन के लिए अहम पड़ाव है। भारत अब उन देशों की कतार में शामिल होने की ओर बढ़ रहा है, जो इंसानों को अंतरिक्ष में भेजकर सुरक्षित वापस लाने में सक्षम हैं।

श्रीहरिकोटा में सफल रहा अहम स्पेस टेस्ट

ISRO ने IADT-02 टेस्ट को सतीश धवन स्पेस सेंटर में सफलतापूर्वक अंजाम दिया। इस दौरान डमी क्रू मॉड्यूल को ऊंचाई से गिराकर पैराशूट सिस्टम की जांच की गई, जो सही समय पर खुला। यह सिस्टम अंतरिक्ष से लौटते समय तेज रफ्तार को कम कर सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित करता है, और इस सफलता से इसकी विश्वसनीयता साबित हुई है।

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गगनयान से पहले होंगे तीन मानवरहित मिशन

इसरो के अध्यक्ष वी. नारायणन ने बताया कि ISRO गगनयान मिशन से पहले तीन मानवरहित उड़ानें भेजेगा। उन्होंने कहा कि फिलहाल पहला अनक्रूड मिशन तैयार किया जा रहा है और सभी तैयारियां तय योजना के अनुसार आगे बढ़ रही हैं। मिशन की टाइमलाइन और अन्य अहम जानकारी सही समय पर साझा की जाएगी।

लॉन्च से ज्यादा अहम होता है लंबा मिशन ऑपरेशन

वी. नारायणन ने कहा कि किसी भी स्पेस मिशन की सफलता सिर्फ लॉन्च पर निर्भर नहीं होती, बल्कि लंबे समय तक चलने वाले ऑपरेशंस पर भी टिकी होती है। उन्होंने बताया कि रॉकेट कुछ ही मिनट काम करता है, लेकिन उपग्रहों को सालों तक संभालना पड़ता है। Mars Orbiter Mission का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इसमें करीब 300 दिनों तक लगातार ऑपरेशन चलाया गया था, तब जाकर यह सफल हुआ।

Keywords: Gaganyaan Mission ISRO, ISRO Air Drop Test Success IADT-02, India Human Spaceflight Mission

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