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बगराम एयरबेस भारत के लिए कैसे बन सकता है पाकिस्तान पर नजर रखने का एक बड़ा अड्डा

अफगानिस्तान का बगराम एयरबेस दुनिया के सबसे बड़े फौजी अड्डों में से एक है जो हमेशा हर बड़ी ताकत की नजर में रहता है, इसकी लोकेशन ही इसे इतना खास बना देती है।

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अफगानिस्तान का बगराम एयरबेस दुनिया के सबसे बड़े फौजी अड्डों में गिना जाता है जो हमेशा हर बड़ी ताकत की नजर में रहता है। यह जगह काबुल शहर से सिर्फ 60 किलोमीटर उत्तर में परवान प्रांत में है और इसके दो रनवे में से एक ढाई किलोमीटर से ज्यादा लंबा है। यहां की ऊंची और मजबूत दीवारें कई किलोमीटर तक फैली हुई हैं जो बाहर के किसी भी खतरे को आसानी से रोक सकती हैं। एक समय में यहां 10 हजार से ज्यादा फौजी आराम से रह सकते थे क्योंकि रहने की जगह और बैरक भरपूर थी। अब तालिबान की फौजें यहां अमेरिका के छोड़े हुए सामान से परेड करती दिखती हैं जो इसकी पिछली शान को याद दिलाती हैं।

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इतिहास की गवाही देता यह मजबूत अड्डा

इस एयरबेस को सबसे पहले 1950 के दशक में सोवियत संघ ने बनवाया था और 1980 के समय में अफगानिस्तान पर कब्जे के दौरान यह उनका मुख्य केंद्र बन गया था। साल 2001 में जब अमेरिका ने तालिबान को हटाया तब इस पर उसका कब्जा हो गया। तब यह जगह खंडहर जैसी हो चुकी थी लेकिन अमेरिकी फौज ने इसे दोबारा चमकाया और 77 वर्ग किलोमीटर तक फैला दिया। कंक्रीट और स्टील से बनी यह जगह दुनिया की सबसे मजबूत एयरबेस में से एक बन गई। अमेरिका ने यहां से पूरे इलाके पर नजर रखी और बड़े फौजी ऑपरेशन चलाए। अब जब अमेरिका इसे छोड़ चुका है तो हर कोई इसकी अहमियत समझता है।

चीन के परमाणु ठिकाने से बेहद कम दूरी

बगराम से चीन की सबसे नजदीकी परमाणु परीक्षण की जगह लोप नूर की दूरी करीब 2000 किलोमीटर है जो उत्तर पश्चिम चीन में है। तेज फौजी विमान जैसे लॉकहीड एसआर 71 ब्लैकबर्ड इस फासले को एक घंटे में तय कर सकते हैं। यही वजह है कि अमेरिका इसे दोबारा हासिल करना चाहता है क्योंकि इससे चीन के परमाणु प्रोग्राम पर सीधी नजर रखी जा सकती है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि यह जगह चीन के परमाणु हथियार बनाने की जगह से बस एक घंटे दूर है। इससे मध्य एशिया में अमेरिका की हवाई ताकत बढ़ सकती है और ईरान की राजधानी तेहरान भी यहां से 1644 किलोमीटर की हवाई दूरी पर है।

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पाकिस्तान के लिए एक छिपा हुआ खतरा

बगराम से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और बलूचिस्तान की दूरी भी बहुत कम है जिससे भारत के लिए यह जगह सोने की खान जैसी बन सकती है। अगर भारत यहां तक पहुंच बना ले तो पाकिस्तान की हर गलत हरकत पर तुरंत जवाब दिया जा सकता है। पाकिस्तान को हमेशा डर लगा रहेगा कि अफगानिस्तान की तरफ भारत जैसा मजबूत पड़ोसी मौजूद है। भारत ने हमेशा अफगानिस्तान के फिर से बनने में मदद की है और चाबहार बंदरगाह में पैसा लगाया है। ताजिकिस्तान के आयनी एयरबेस के बाद बगराम भारत की मध्य एशिया में पकड़ को और मजबूत कर सकता है।

अमेरिका की वापसी की बार बार कोशिश

अमेरिका बगराम को फिर से लेना चाहता है क्योंकि इससे चीन और ईरान पर नजर रखना आसान हो जाएगा। ट्रंप ने कहा था कि हम इसे छोड़कर गलती कर बैठे हैं और अब तालिबान से बात चल रही है। लेकिन तालिबान ने साफ इनकार कर दिया है कि कोई विदेशी फौज यहां नहीं आएगी। इलाके के देश जैसे भारत, पाकिस्तान, चीन और रूस भी अमेरिका की वापसी के खिलाफ हैं। इससे इलाके में शांति बनी रहेगी और अफगानिस्तान अपनी आजादी बचाएगा। बगराम की ताकत अब नए दौर में सबकी प्लानिंग बदल रही है जहां हर कदम बहुत सोच समझकर उठाया जा रहा है।

Keywords: Bagram Airbase Strategic Importance, US Military Return Afghanistan, India Afghanistan Relations, Bagram Airfield Geopolitical Role

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