राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 साल पूरे होने के मौके पर संसद में सोमवार को एक ऐतिहासिक चर्चा शुरू हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में इस चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम्’ सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि यह स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा है। उन्होंने बताया कि यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन की ऊर्जा बना और कई स्वतंत्रता सेनानियों को प्रेरित किया। इस चर्चा के लिए संसद में 10 घंटे का समय तय किया गया है, जिसमें इस गीत से जुड़े कुछ कम जाने जाने वाले ऐतिहासिक पहलुओं को भी साझा किया जाएगा। यह सिर्फ एक यादगार अवसर नहीं, बल्कि भारतीय राष्ट्रीय भावना को फिर से सशक्त करने का भी मौका है।
पीएम मोदी की टिप्पणी
बहस की शुरुआत में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाया, कहां कि पार्टी ने वंदे मातरम् के कुछ मूल छंदों को हटाने की कोशिश की थी। इस आरोप से सदन में गर्मागर्मी बढ़ सकती है। मोदी ने आगे कहा कि वंदे मातरम् के 50, 100 और अब 150 वर्षों के ऐतिहासिक पड़ाव भारत की राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों का प्रतीक हैं। उन्होंने आपातकाल (Emergency) के दौर का उल्लेख करते हुए कहा कि जब देश अपनी स्वतंत्रता की 100वीं वर्षगांठ की ओर बढ़ रहा था, तब लोकतंत्र को दबा दिया गया था। प्रधानमंत्री के इन बयानों से यह साफ है कि इस बहस में न सिर्फ ऐतिहासिक चर्चा होगी, बल्कि यह राजनीतिक मतभेदों से भी भरपूर रहेगी।
Speaking in the Lok Sabha. https://t.co/qYnac5iCTB
— Narendra Modi (@narendramodi) December 8, 2025
विपक्ष भी तैयार, कई अहम चेहरे लेंगे हिस्सा
इस बहस में सत्ता पक्ष के साथ-साथ विपक्ष भी अपनी बात मजबूती से रखने की तैयारी में है। कांग्रेस की ओर से प्रियंका गांधी, गौरव गोगोई और अन्य वरिष्ठ सांसद इस चर्चा में भाग लेंगे। विपक्ष का मुख्य फोकस इस बात पर रहेगा कि वंदे मातरम् को किसी एक विचारधारा तक सीमित न किया जाए, बल्कि इसे पूरे राष्ट्र की सामूहिक धरोहर के रूप में माना जाए। यह उम्मीद की जा रही है कि दोनों पक्ष, वंदे मातरम् के महत्व पर सहमत होने के बावजूद, इसके इतिहास और राजनीति पर अलग-अलग दृष्टिकोण रखेंगे।
राज्यसभा में भी जारी रहेगा विमर्श
9 दिसंबर को राज्यसभा में भी ‘वंदे मातरम्’ पर एक व्यापक चर्चा होगी, जहां बहस की शुरुआत गृह मंत्री अमित शाह करेंगे और स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा दूसरे वक्ता होंगे। राज्यसभा की चर्चा का मुख्य फोकस वंदे मातरम् के सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और राष्ट्रवाद से जुड़े पहलुओं पर रहेगा। यह गीत केवल इतिहास का हिस्सा नहीं है, बल्कि उसकी पंक्तियां आज भी एकता, त्याग और राष्ट्रभक्ति की भावना को सशक्त बनाती हैं। संसद में होने वाली यह दो-दिवसीय बहस सिर्फ इसके 150 वर्ष के उत्सव का हिस्सा नहीं, बल्कि भारतीय राष्ट्रवाद की निरंतर यात्रा का प्रतीक भी है।
Keywords: Vande Mataram 150th Anniversary, National Song, Lok Sabha, Rajya Sabha

