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अलविदा आशा ताई! पंचतत्व में विलीन हुई सुरों की मल्लिका, नम आंखों से अपनो ने दी अंतिम विदाई

सुरों की मल्लिका आशा भोसले का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। उनका 12 अप्रैल को निधन हुआ था। कई नेता और अभिनेता उन्हें श्रद्धांजलि देने उनके घर पहुंचे।

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Asha Bhosle Funeral: आशा भोसले अमर रहें’ के नारों के बीच दिवंगत गायिका के पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए मुंबई के शिवाजी पार्क ले जाया गया। वहां उनके बेटे आनंद ने पूरे विधि-विधान के साथ मां को मुखाग्नि दी और उन्हें अंतिम विदाई दी गई। इस दौरान माहौल बेहद भावुक रहा और संगीत जगत के कई बड़े कलाकारों ने उन्हें गीत गाकर श्रद्धांजलि दी, जिनमें शान और अनूप जलोटा जैसे नाम शामिल रहे। सभी ने मिलकर सुरों की इस महान शख्सियत को भावपूर्ण विदाई दी।

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92 वर्ष की उम्र में आशा भोसले का रविवार को मुंबई में निधन हो गया था। वे पिछले कुछ समय से बीमार चल रही थीं। सांस लेने में परेशानी के कारण 11 अप्रैल को उन्हें ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां हालत बिगड़ने पर उन्हें ICU में शिफ्ट किया गया। शुरुआती रिपोर्टों में हार्ट अटैक की बात सामने आई थी, लेकिन बाद में डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि उनकी मौत मल्टी-ऑर्गन फेलियर के कारण हुई।

आशा भोसले को अंतिम विदाई, सेलेब्स ने दी श्रद्धांजलि

अंतिम संस्कार से पहले आशा भोसले को अंतिम दर्शन के लिए कई बड़ी हस्तियां उनके घर पहुंचीं। फिल्म और संगीत जगत से जुड़े कई सितारों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी, जिनमें मोहम्मद सिराज, तब्बू, जैकी श्रॉफ, अनुराधा पौडवाल, ए.आर. रहमान, शबाना आजमी, फरहान अख्तर, रणवीर सिंह और रितेश देशमुख जैसे नाम शामिल रहे। सभी ने भावुक होकर सुरों की इस महान शख्सियत को अंतिम विदाई दी।

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श्मशान भूमि पर भी माहौल बेहद भावुक रहा, जहां सुदेश भोसले ने ‘जिंदगी एक सफर है सुहाना’ गाकर श्रद्धांजलि दी। वहीं अनूप जलोटा ने भजन की कुछ पंक्तियां गाईं और सिंगर शान ने भी गीत गाकर आशा भोसले को भावपूर्ण विदाई दी। पूरे माहौल में संगीत और सम्मान के साथ उन्हें याद किया गया।

ताओं ने दी श्रद्धांजलि, संगीत जगत में शोक की लहर

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस समेत कई बड़े नेताओं ने भी आशा भोसले को अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके निधन से पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है और भारतीय संगीत जगत का एक सुनहरा अध्याय समाप्त हो गया है। आशा भोसले अपने पीछे हजारों ऐसे गीत छोड़ गई हैं, जो हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेंगे। उनकी जिंदगी संघर्ष, मेहनत और लगन की एक प्रेरणादायक कहानी है। उन्होंने यह साबित किया कि चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, अगर जुनून और मेहनत कायम रहे तो इंसान अपनी पहचान और अपनी ‘सुर’ कभी नहीं खोता।

सुरों की विरासत छोड़ गईं आशा भोसले

आशा भोसले का जन्म 8 सितंबर 1933 को महाराष्ट्र के सांगली जिले में हुआ था। वे प्रसिद्ध संगीतकार दीनानाथ मंगेशकर की बेटी थीं और बचपन से ही संगीत के माहौल में पली-बढ़ीं। कम उम्र में ही उन्होंने और उनकी बहन लता मंगेशकर ने परिवार की जिम्मेदारी संभालनी शुरू कर दी थी। आशा भोसले ने बहुत छोटी उम्र में ही अपने गायन करियर की शुरुआत कर दी थी। साल 1943 में उन्होंने मराठी फिल्म ‘माझा बाल’ में पहला गीत गाया, जबकि 1948 में हिंदी फिल्म ‘चुनरिया’ के गाने ‘सावन आया’ से उन्होंने बॉलीवुड में अपनी पहचान बनानी शुरू की। अपने लंबे और शानदार करियर में उन्होंने 20 से ज्यादा भाषाओं में करीब 12,000 से अधिक गीत गाए, जिससे वे भारतीय संगीत इतिहास की सबसे बहुमुखी गायिकाओं में शामिल हो गईं।

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