देश की राजधानी दिल्ली के लाल किले के पास हुए विस्फोट की जांच के दौरान कई अहम खुलासे हो रहे हैं। इस ब्लास्ट के बाद जब जांचकर्ताओं ने इसकी तह में जाना शुरू किया तो यह जानकारी सामने आई कि आतंकी देश के कई हिस्सों को दहलाने की कोशिश में थे। साथ ही उनकी मंशा बाबरी विध्वंस का बदला लेने की थी और इसके लिए उन्होंने 6 दिसंबर की तारीख चुनी थी। इस नापाक साजिश को अंजाम देने के लिए जैश-ए-मोहम्मद ने अपने “डॉक्टर मॉड्यूल” के सदस्यों को चुना था। यह जानकारी तब सामने आई जब सुरक्षा एजेंसियों ने ब्लास्ट के बाद कई संदिग्धों को हिरासत में लिया। मीडिया इनपुट के अनुसार, आतंकवादी इस ब्लास्ट को अगस्त महीने में अंजाम देना चाहते थे, लेकिन बाद में उन्होंने 6 दिसंबर की तारीख तय की।
इस बीच जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में पहला आतंकी गिरफ्तार हुआ, जिसके बाद फरीदाबाद में बड़ी कार्रवाई हुई। इन कार्रवाइयों के बाद आतंकियों को अंदेशा हो गया कि अब भारतीय सुरक्षा एजेंसियां जल्द ही उन्हें पकड़ लेंगी। इसी डर में आतंकी घबरा गए। इसी दौरान 10 नवंबर को सफेद रंग की एक कार में आतंकी डॉ. उमर नबी लाल किले के पास पहुंचा, जहां कार में जोरदार धमाका हुआ और उसके परखच्चे उड़ गए। अब जो जानकारी सामने आई है, उसके मुताबिक इस ब्लास्ट में कार चला रहे आतंकी डॉ. उमर नबी की मौत हो गई है। उमर नबी को इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। इस धमाके में करीब 30 लोग घायल हुए, जबकि एक दर्जन लोगों की मौत हुई।
कौन था उमर नबी?
खबरों के मुताबिक, दिल्ली ब्लास्ट में सफेद रंग की कार चलाने वाला उमर नबी मूल रूप से जम्मू-कश्मीर का रहने वाला था। आतंकी उमर नबी पेशे से एक डॉक्टर था और आतंकी संगठनों अंसार गजवात-उल-हिंद तथा जैश-ए-मोहम्मद से उसका जुड़ाव था। सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई के दौरान फरीदाबाद में मिली दो AK-47 राइफल और 350 किलो अमोनियम नाइट्रेट वाले मामले में भी उमर नबी का नाम सामने आया था। फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर खुफिया विभाग और जांच एजेंसियां लगातार जांच में जुटी हैं। ब्लास्ट से जुड़ी हर जानकारी एकत्र की जा रही है, और अब तक कई संदिग्धों को हिरासत में लिया जा चुका है।
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