लखनऊ: उत्तर प्रदेश में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस मुद्दे पर विपक्षी दल लगातार योगी सरकार को घेर रहे हैं और इसे लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। वहीं, दूसरी ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी अब इस विवाद पर खुलकर हमलावर नजर आ रहे हैं।
एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संत, संन्यासी और सनातन धर्म को लेकर अहम टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि संन्यासी और संत के लिए धर्म सर्वोपरि होता है। संन्यासी की कोई व्यक्तिगत संपत्ति नहीं होती, बल्कि राष्ट्र ही उसका स्वाभिमान होता है। मुख्यमंत्री ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश की जा रही है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसे कई “कालनेमि” हैं, जो सनातन को बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं, और समाज को उनसे सतर्क रहने की जरूरत है।
क्या है स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विवाद
प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर जोगेंद्र कुमार के अनुसार, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सुबह करीब 9 बजे लगभग 200 अनुयायियों के साथ उस क्षेत्र में पहुंचे, जिसे सुरक्षा कारणों से एक दिन पहले ही बंद कर दिया गया था। पुलिस का आरोप है कि उनके समर्थकों ने बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की, इस दौरान पुलिस के साथ धक्का-मुक्की भी हुई। पूरी घटना के सीसीटीवी फुटेज मौजूद हैं, जिनके आधार पर मामले की जांच की जा रही है।
तीन घंटे तक बाधित रहा रास्ता
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद संगम नोज जाने पर अड़े हुए थे, जबकि उस समय वहां भारी भीड़ मौजूद थी। सुबह कोहरे के कारण 9 से 10 बजे के बीच संगम क्षेत्र में सबसे अधिक भीड़ रहती है। पुलिस ने उन्हें समझाने का प्रयास किया कि 200 लोगों और एक रथ के साथ आगे बढ़ने से भगदड़ की स्थिति बन सकती है, लेकिन वे नहीं माने।
आरोप है कि समर्थकों ने छोटे बच्चों को आगे कर अव्यवस्था फैलाने की कोशिश की और करीब तीन घंटे तक वापसी का रास्ता भी बाधित रहा। इससे आम श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
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