बेंगलुरु में अचानक आए भीषण मौसम ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया। तेज बारिश और ओलावृष्टि ने कुछ ही घंटों में शहर की तस्वीर बदल दी। जहां एक ओर 37 डिग्री सेल्सियस की गर्मी से लोगों को राहत मिली, वहीं दूसरी ओर इस तूफानी मौसम ने बड़ा नुकसान भी पहुंचाया। अब तक इस आपदा में कम से कम 10 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।
सबसे दर्दनाक हादसा बोवरिंग और लेडी कर्जन अस्पताल में हुआ, जहां भारी बारिश के चलते अस्पताल की एक दीवार ढह गई। इस हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हो गए। बताया जा रहा है कि यह इलाका काफी व्यस्त रहता है, जहां बड़ी संख्या में राहगीर और ठेला लगाने वाले मौजूद रहते हैं।
करंट लगने और हादसों से मौत
बारिश के दौरान अलग-अलग जगहों पर भी हादसे हुए। बैनरघट्टा रोड पर एक व्यक्ति की करंट लगने से मौत हो गई। वहीं एक छात्र सैयद सूफियान की भी उस समय जान चली गई, जब वह अपनी बाइक खड़ी कर रहा था और खुले बिजली के तार की चपेट में आ गया।
मकान गिरने से गई जान
तेज आंधी-तूफान के बीच एक अन्य घटना में मंजूनाथ नामक व्यक्ति की मौत हो गई, जब उसके घर की छत पर सीमेंट का भारी टुकड़ा गिर गया। इस हादसे में उसकी मौके पर ही जान चली गई।
शहर की व्यवस्था हुई ठप
लगातार दो घंटे की बारिश ने शहर की सड़कों को पानी-पानी कर दिया। रिचमंड टाउन और शांतिनगर जैसे इलाकों में सड़कों पर कमर तक पानी भर गया। यहां तक कि विधान सौधा के अंदर भी पानी घुस गया, जिससे विपक्ष के नेता के कार्यालय तक प्रभावित हुआ।
ट्रैफिक और मेट्रो सेवा पर असर
शाम के व्यस्त समय में हुई इस बारिश ने हजारों लोगों को रास्ते में ही फंसा दिया। शहर के कई प्रमुख मार्गों पर लंबा जाम लग गया। मेट्रो सेवाएं भी प्रभावित हुईं। फायर ब्रिगेड और ट्रैफिक पुलिस ने रातभर पानी निकालने और सड़कों से गिरे पेड़ों को हटाने का काम किया।
किताबों की दुकान को भारी नुकसान
चर्च स्ट्रीट स्थित एक मशहूर किताबों की दुकान को भी भारी नुकसान हुआ। बारिश के पानी में डूबने से करीब 4 से 5 हजार किताबें खराब हो गईं। इस नुकसान के बाद शहर के पुस्तक प्रेमी सोशल मीडिया पर एकजुट होकर दुकान की मदद के लिए आगे आ रहे हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया और मुआवजा
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने घटना पर चिंता जताते हुए राज्य सरकार से ऐसे हादसों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि दीवार में पहले से दरारें थीं और प्रभावित लोगों, खासकर रेहड़ी-पटरी वालों को उचित मुआवजा मिलना चाहिए। फिलहाल, अस्पताल की पुरानी दीवार के निर्माण में लापरवाही को लेकर जांच शुरू कर दी गई है।
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