बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन आज यानी 11 अक्टूबर 2025 को अपना 83वां जन्मदिन मना रहे हैं। आज वे जिस ऊँचाई पर हैं, उसका सफर 1960 के दशक में एक साधारण सपने के साथ शुरू हुआ था, जब वे नौकरी छोड़कर एक्टिंग का मौका ढूंढने बॉम्बे (अब मुंबई) पहुँचे थे। उनकी पहली फिल्म ‘सात हिंदुस्तानी’ थी, जो 1969 में रिलीज हुई। इस फिल्म में अमिताभ ने एक उर्दू शायर का छोटा, पर यादगार रोल निभाया था। फिल्मकार ख्वाजा अहमद अब्बास ने इस कहानी में सात भारतीयों की बहादुरी दिखाई थी, जो गोवा को पुर्तगालियों की गुलामी से आज़ाद कराने के लिए लड़ते हैं। यह छोटी सी भूमिका ही उनके सुपरस्टार बनने की पहली सीढ़ी थी।
बॉम्बे में सपनों की शुरुआत और अब्बास से मुलाकात
दरअसल, ख्वाजा अहमद अब्बास अपनी फिल्म ‘सात हिंदुस्तानी’ के लिए देश के सात अलग-अलग राज्यों और धर्मों के कलाकारों को लेना चाहते थे। एक दिन उनकी चौथी मंजिल पर बने ऑफिस में एक लंबा, सादे कपड़े पहने नौजवान आया। उसने अपना नाम अमिताभ बताया। जब अब्बास ने नाम का मतलब पूछा तो नौजवान ने बताया, “गौतम बुद्ध का एक नाम, यानी सूरज।” अमिताभ ने बताया कि उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है और कोलकाता में ₹1600 महीने की नौकरी छोड़कर एक्टिंग का मौका ढूँढने आए हैं। ख्वाजा अब्बास को उनकी सादगी और एक्टिंग करने की हिम्मत बहुत पसंद आई। उन्होंने तुरंत अपने सेक्रेटरी अब्दुल रहमान से कॉन्ट्रैक्ट तैयार करने को कहा, लेकिन उससे पहले उन्होंने अमिताभ के पिता हरिवंश राय बच्चन से इजाजत मांगी। तीन दिन बाद दिल्ली से टेलीग्राम आया, जिसमें लिखा था, “आपके साथ मुझे कोई आपत्ति नहीं।”
सेट पर सीखने की लगन और सच्ची मेहनत
फिल्म की शूटिंग बॉम्बे में एक स्कूल हॉल में शुरू हुई, जिसे सत्याग्रहियों का कैंप बनाया गया था। अमिताभ को उस समय उर्दू नहीं आती थी, इसलिए उन्होंने अपने साथी कलाकारों उस्ताद जलाल आगा और उत्पल दत्त से उर्दू ग़ज़लें सीखीं। एक सीन में उत्पल दत्त ने स्क्रिप्ट के हिसाब से अमिताभ को उकसाया, तो अमिताभ इतने जोश में आ गए कि सच में झगड़ा होने वाला था! गोवा में शूटिंग के दौरान पूरी टीम बहुत साधारण कमरों में रही, यहाँ तक कि उन्हें फर्श पर सोना पड़ा था। अमिताभ हर रात अपने माता-पिता को चिट्ठी लिखा करते थे। ख्वाजा अब्बास ने बाद में लिखा था कि अमिताभ रिहर्सल में घंटों मेहनत करते थे, और उन्हें पंजाबी व मुस्लिम किरदारों की बगावत और शायरी बहुत पसंद थी। उनकी यह लगन देखकर बाकी कलाकार भी हैरान हो जाते थे।
‘सात हिंदुस्तानी’ ने बदल दी किस्मत
भले ही ‘सात हिंदुस्तानी’ फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बहुत ज्यादा कमाई नहीं कर पाई, लेकिन इसे राष्ट्रीय पुरस्कार मिला और अमिताभ की एक्टिंग की बहुत तारीफ हुई। अब्बास ने बाद में साफ किया था कि अमिताभ को कोई सिफारिश नहीं मिली थी, और न ही किसी प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का कोई पत्र आया था। यह सिर्फ़ उनकी मेहनत और ख्वाजा अब्बास के भरोसे का नतीजा था। इस फिल्म ने अमिताभ बच्चन को पहचान दी और कुछ ही सालों में ‘जंजीर’ जैसी बड़ी हिट फिल्मों ने उन्हें पूरे देश का सुपरस्टार बना दिया। आज उनके 83वें जन्मदिन पर मुंबई से लेकर पूरे देश के फैंस में वही जोश देखने को मिल रहा है।
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