20 अक्टूबर 2025 को देशभर में दिवाली का त्योहार बड़े धूमधाम से मनाया गया। अब 23 अक्टूबर को भाई दूज का पावन पर्व मनाया जाएगा। यह त्योहार दिवाली के दो दिन बाद आता है और भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करने का खास दिन होता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों को तिलक लगाती हैं और उनकी लंबी उम्र और खुशहाली की दुआ करती हैं। भाई भी अपनी बहनों को प्यार और सम्मान के रूप में उपहार देते हैं।
भाई दूज सिर्फ एक धार्मिक रिवाज नहीं है, बल्कि यह त्योहार भारतीय परिवारों में प्यार, एकता और आपसी संबंधों को मजबूत करने का एक सुंदर तरीका है। इस दिन भाई-बहन एक साथ समय बिताते हैं, मिठाइयां खाते हैं और अपने बचपन की यादों को ताजा करते हैं। यह त्योहार हमें रिश्तों की अहमियत और आपसी जुड़ाव का एहसास कराता है।
त्योहार की परंपरा और पूजा विधि
भाई दूज के दिन बहनें सुबह जल्दी उठकर नहाती हैं और घर को अच्छे से सजाती हैं। इसके बाद वे पूजा की थाली तैयार करती हैं, जिसमें रोली (तिलक लगाने वाला रंग), अक्षत (चावल), दीपक, मिठाई और नारियल रखा जाता है। जब भाई घर आता है, तो बहन उसे तिलक लगाती है, उसकी आरती उतारती है और अच्छे खाने से उसका स्वागत करती है। भाई भी अपनी बहन को गिफ्ट या आशीर्वाद देकर अपना प्यार जताता है। यह परंपरा कई सालों से चली आ रही है और इसका मकसद भाई-बहन के रिश्ते को और मजबूत बनाना है। ऐसा माना जाता है कि बहन का आशीर्वाद भाई की रक्षा करता है और भाई का प्यार बहन की सुरक्षा करता है। इस दिन की सबसे खास बात यह है कि भाई-बहन साथ बैठकर हंसी-मज़ाक करते हैं, पुराने किस्से याद करते हैं और एक-दूसरे के साथ अपने रिश्ते की मिठास को महसूस करते हैं।
कब है शुभमुहूर्त ?
ज्योतिष के अनुसार, इस साल भाई दूज पर तिलक का शुभ समय दोपहर 1:19 बजे से 3:35 बजे तक रहेगा। यह समय भाई-बहन के रिश्ते में प्यार, सौभाग्य और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने वाला माना गया है।
यमराज और यमुना की कहानी
भाई दूज से जुड़ी सबसे लोकप्रिय कहानी यमराज और उनकी बहन यमुना की है। कहा जाता है कि यमुना कई बार अपने भाई यमराज को घर आने का निमंत्रण देती थीं, लेकिन यमराज अपने काम में इतने व्यस्त रहते थे कि आ नहीं पाते थे। एक दिन अचानक यमराज अपनी बहन से मिलने उनके घर आ गए। यमुना अपने भाई को देखकर बहुत खुश हुईं। उन्होंने यमराज का तिलक किया, आरती उतारी और प्यार से खाना खिलाया। यमुना के इस स्नेह और सेवा से यमराज बहुत खुश हुए। उन्होंने अपनी बहन को वरदान दिया कि जो भाई इस दिन अपनी बहन से तिलक करवाएगा, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा और उसकी उम्र लंबी होगी। तभी से भाई दूज का पर्व “यम द्वितीया” के रूप में मनाया जाने लगा। इस दिन बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र की कामना करती हैं और भाई अपनी बहनों की रक्षा का वचन देते हैं। यह कहानी भाई-बहन के रिश्ते की गहराई और प्यार को दर्शाती है, और बताती है कि यह त्योहार केवल रस्मों का नहीं, बल्कि आपसी स्नेह और विश्वास का प्रतीक है।
रिश्तों की मिठास बढ़ाने वाला पर्व
भाई दूज का त्योहार सिर्फ एक धार्मिक अवसर नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और भावनात्मक रूप से भी बहुत खास होता है। यह दिन भाई और बहन के रिश्ते को और मजबूत करने का मौका देता है। आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में जब परिवारों के पास एक-दूसरे के लिए समय कम होता जा रहा है, ऐसे में भाई दूज एक ऐसा दिन है जो अपनों को फिर से करीब लाता है। भाई-बहन साथ बैठते हैं, बातें करते हैं और अपने रिश्ते की मिठास को महसूस करते हैं। यह त्योहार प्रेम, विश्वास और सम्मान का प्रतीक है। दिवाली की रौशनी के बाद भाई दूज का यह पर्व रिश्तों में भी उजाला भरने का काम करता है। यह हमारी संस्कृति की एक सुंदर परंपरा है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी भाई-बहन के प्यार को बनाए रखने का काम करती है।
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