बिहार की राजनीति में महिला वोटरों का बड़ा रोल रहा है और पिछले बीस सालों में इनकी भागीदारी लगातार बढ़ी है। साल 2000 के विधानसभा चुनाव से लेकर 2020 के चुनाव तक महिला वोटरों की गिनती सभी पार्टियों के लिए बहुत ज़रूरी हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहले से ही महिलाओं के लिए कई अच्छी योजनाएं चला रहे हैं, वहीं अब तेजस्वी यादव भी महिला वोटरों को लुभाने के लिए बड़े-बड़े वादे कर रहे हैं। आइए जानते हैं कि इन सालों में महिला वोटिंग का तरीका कैसा रहा और इससे राज्य की राजनीति कैसे बदल गई।
2000 के चुनाव से शुरू हुआ बदलाव
साल 2000 के बिहार विधानसभा चुनाव में कुल 62.57 प्रतिशत वोट पड़े थे। इस चुनाव में 70.71 प्रतिशत पुरुष वोटरों ने वोट दिया, जबकि 53.28 प्रतिशत महिला वोटर ही घर से बाहर निकली थीं। इस हिसाब से, पुरुष मतदाताओं के मुकाबले महिलाओं का वोट प्रतिशत काफी कम था। इसके बाद फरवरी 2005 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में कुल 46.5 प्रतिशत वोट डाले गए थे। इस बार पुरुषों का वोट अनुपात 49.95 प्रतिशत था, लेकिन महिला वोटरों की गिनती 42.52 प्रतिशत पर ही रुक गई थी, जो पिछले चुनाव से करीब दस प्रतिशत कम था। अक्टूबर 2005 में दोबारा चुनाव हुए, जिसमें कुल 45.85 प्रतिशत वोट पड़े। इस चुनाव में 47.02 प्रतिशत पुरुषों ने वोट डाला, जबकि महिलाओं का प्रतिशत 44.49 रहा। इसी चुनाव के बाद राज्य में नीतीश कुमार की सरकार बनी थी।
महिलाओं ने कब पुरुषों को पीछे छोड़ा?
2010 के विधानसभा चुनाव में महिलाओं ने वोट डालने में रिकॉर्ड बना दिया था। इस चुनाव में कुल 52.47 प्रतिशत वोट पड़े थे, जिसमें महिलाओं का अनुपात 54.49 प्रतिशत था, जो पुरुषों के वोट प्रतिशत 51.12 फीसदी से ज़्यादा था। इस तरह से, महिलाओं ने वोट डालने के मामले में पुरुषों को पीछे छोड़ दिया था। साल 2015 के विधानसभा चुनाव में भी महिलाएं बड़ी संख्या में वोट देने निकलीं। इस चुनाव में कुल 56.66 प्रतिशत वोट पड़े थे। 60.48 प्रतिशत महिला वोटर अपने घर से वोट डालने निकली थीं, जबकि पुरुष वोटर इस बार भी पीछे रह गए और उनका वोट प्रतिशत 53.32 प्रतिशत ही रहा था। इस चुनाव के बाद राज्य में महागठबंधन की सरकार बनी थी।
2020 में भी महिला वोटरों की बड़ी भूमिका
2020 के विधानसभा चुनाव में महिला वोटरों की गिनती में थोड़ी कमी ज़रूर आई, लेकिन फिर भी यह पुरुषों के मुकाबले काफी ज़्यादा था। इस विधानसभा चुनाव में कुल 56.93 प्रतिशत वोट पड़े थे। 59.69 प्रतिशत महिलाओं ने अपना वोट दिया था, जबकि 54.45 प्रतिशत पुरुष ही वोट डालने के लिए निकले थे। इन आंकड़ों से साफ है कि पिछले दो दशकों में महिला वोटरों की भागीदारी लगातार बढ़ी है और बिहार की राजनीति में उनका रोल अब बहुत बड़ा हो गया है।
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