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ईरान युद्ध पर कांग्रेस का बदला रुख? थरूर के बाद मनीष तिवारी ने भी मोदी सरकार का किया समर्थन

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा सांसद मनीष तिवारी ने मोदी सरकार के रुख की सराहना करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत ने संतुलित और सीमित भूमिका अपनाई है, जो पूरी तरह सही है।

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नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा सांसद मनीष तिवारी ने मोदी सरकार के रुख की सराहना करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत ने संतुलित और सीमित भूमिका अपनाई है, जो पूरी तरह सही है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति को केवल एक युद्ध के रूप में नहीं देखा जा सकता, क्योंकि यहां कई स्तरों पर अलग-अलग संघर्ष एक साथ चल रहे हैं।

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मनीष तिवारी के मुताबिक, इज़रायल, ईरान और अमेरिका के बीच जारी टकराव सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति और शक्ति संतुलन से जुड़ा हुआ है। उन्होंने साफ कहा कि यह भारत की लड़ाई नहीं है।

भारत के कूटनीतिक प्रयास तेज

इस पूरे संकट के दौरान भारत ने सावधानीपूर्ण और संतुलित रुख अपनाते हुए लगातार बातचीत और कूटनीति पर जोर दिया है। एक ओर भारत ने खाड़ी क्षेत्र में ईरान के हमलों पर चिंता जताई है, वहीं दूसरी तरफ तेहरान के साथ संबंध बनाए रखते हुए ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित करने के लिए सक्रिय प्रयास भी जारी रखे हैं।

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खासतौर पर होरमुज़ जलडमरूमध्य, जहां से दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस का व्यापार होता है, भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम बना हुआ है।

शशि थरूर ने भी किया समर्थन

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने भी इस मुद्दे पर मोदी सरकार के रुख का समर्थन किया है। उनका कहना है कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष पर भारत का “चुप रहना” कमजोरी नहीं, बल्कि जिम्मेदार कूटनीति का हिस्सा है।

थरूर के अनुसार, मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भारत “मल्टी-अलाइनमेंट” की नीति अपनाते हुए अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दे रहा है। वे मानते हैं कि भले ही युद्ध अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ हो, लेकिन हर मुद्दे पर खुलकर प्रतिक्रिया देना हमेशा सही रणनीति नहीं होती, खासकर जब उससे देश के आर्थिक, ऊर्जा और रणनीतिक हित प्रभावित हो सकते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि खाड़ी क्षेत्र में भारत का व्यापार, तेल-गैस आपूर्ति और वहां रह रहे लाखों भारतीयों की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में संतुलित विदेश नीति जरूरी है।

संतुलन और व्यावहारिकता पर जोर

थरूर के मुताबिक, विदेश नीति भावनाओं से नहीं बल्कि व्यावहारिकता और जिम्मेदारी से तय होती है। भारत को अपने वैश्विक संबंधों और रणनीतिक हितों के बीच संतुलन बनाए रखना होता है।

अंत में उन्होंने कहा कि भारत का यह रुख “मोरल सरेंडर” नहीं, बल्कि एक समझदारी भरा कदम है, जो राष्ट्रीय हितों और वैश्विक स्थिरता दोनों को ध्यान में रखकर लिया गया है।

Keywords: Manish Tiwari, Iran War India Stance, Congress Supports Modi Government, Shashi Tharoor, India Foreign Policy

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