बिहार में जैसे-जैसे चुनाव करीब आ रहे हैं, नेताओं के बयानों में भी तीखापन बढ़ता जा रहा है। इसी बीच राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने राघोपुर पूर्व में पत्रकारों से बातचीत के दौरान बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा, “नीतीश कुमार अब बिहार के मुख्यमंत्री नहीं बनेंगे।”
इस बयान ने राज्य की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है। यह दावा उस समय आया है जब एनडीए और महागठबंधन दोनों अपनी-अपनी चुनाव रणनीतियों को सक्रिय रूप से आगे बढ़ा रहे हैं।
तेज प्रताप यादव पर राबड़ी देवी की प्रतिक्रिया
जब पत्रकारों ने राबड़ी देवी से उनके बड़े बेटे तेज प्रताप यादव के बारे में सवाल किया, जो इस बार अपनी नई पार्टी से चुनाव लड़ रहे हैं, तो उन्होंने कहा, “यह ठीक है, उसे चुनाव लड़ने दो, वह अपनी जगह सही है।” राबड़ी देवी का यह बयान दिखाता है कि परिवार के भीतर राजनीतिक मतभेदों के बावजूद उन्होंने तेज प्रताप के फैसले को समर्थन और सौम्यता के साथ देखा है। तेज प्रताप, जो पहले RJD के टिकट पर चुनाव जीत चुके हैं, अब अपनी नई पार्टी “जनशक्ति जनता दल (JJD)” के साथ चुनावी मैदान में उतर रहे हैं और अपनी राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
महुआ से फिर चुनावी मुकाबला, लेकिन इस बार अलग झंडे तले
तेज प्रताप यादव इस बार वैशाली जिले की महुआ विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। यह वही सीट है, जहां से उन्होंने 2015 में अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी, जबकि 2020 में उन्होंने हसनपुर सीट से जीत हासिल की थी। इस बार मुकाबला और भी रोचक इसलिए हो गया है क्योंकि RJD ने महुआ सीट से मौजूदा विधायक मुकेश रौशन को उम्मीदवार बनाया है। यानी यह लड़ाई न सिर्फ राजनीतिक है, बल्कि पारिवारिक रंग भी लिए हुए है। तेज प्रताप का कदम उन्हें अपनी ही पार्टी से अलग खड़ा कर रहा है, और इस मुकाबले पर पूरे बिहार की निगाहें टिकी हैं।
RJD से निष्कासन और नई राह की शुरुआत
तेज प्रताप यादव को RJD से छह साल के लिए निष्कासित किया जा चुका है। उन्होंने खुद कहा था कि “RJD में लौटने से बेहतर है कि मैं मौत को चुनूं।” यह बयान उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच बढ़ते मतभेद को दर्शाता है। अब वे अपनी नई पार्टी जनशक्ति जनता दल के जरिए खुद को स्वतंत्र राजनीतिक नेता के रूप में साबित करने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, राबड़ी देवी और लालू यादव परिवार पर सबकी नजरें लगी हैं कि चुनाव के बाद यह पारिवारिक और राजनीतिक दूरी बनी रहेगी या सियासत फिर से उन्हें एक मंच पर ला देगी।
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