राजस्थान हाई कोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म मामले में आसाराम को कोई राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने उसकी उम्रकैद की सजा को बरकरार रखते हुए साफ कर दिया कि उसे दोबारा जेल जाना होगा। इस मामले में आसाराम समेत तीन दोषियों की अपीलों पर सुनवाई हुई, जिसमें कोर्ट ने सह-आरोपी शिल्पी और शरतचंद को राहत दी, लेकिन आसाराम की सजा में कोई बदलाव नहीं किया।
यह फैसला जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की डिविजन बेंच ने सुनाया। मामला उस केस से जुड़ा है, जिसमें आसाराम पर अपने गुरुकुल की नाबालिग छात्रा के यौन शोषण का आरोप साबित हुआ था। फिलहाल वह अंतरिम जमानत पर जेल से बाहर है, लेकिन हाई कोर्ट के फैसले के बाद अब उसे जल्द सरेंडर करना होगा।
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?
साल 2013 में गुरुकुल में पढ़ने वाली एक नाबालिग छात्रा अचानक बेहोश हो गई थी। आश्रम से जुड़ी एक महिला ने उसके माता-पिता से कहा कि बच्ची पर भूत-प्रेत का साया है और इसका समाधान आसाराम ही कर सकते हैं। परिवार इस बात से घबरा गया और बच्ची को अपने घर शाहजहांपुर ले गया। बाद में जब पता चला कि आसाराम जोधपुर के मणाई आश्रम में हैं, तो माता-पिता बेटी को वहां लेकर पहुंचे। इसी घटना के बाद मामला सामने आया और बाद में छात्रा ने आसाराम पर यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाए।
आश्रम के अंदर क्या हुआ?
आरोपों के अनुसार, मणाई आश्रम पहुंचने के बाद छात्रा को अकेले आसाराम के कमरे में भेजा गया, जबकि उसके माता-पिता बाहर धार्मिक अनुष्ठान करते रहे। पीड़िता ने बाद में आरोप लगाया कि वहां उसके साथ गलत हरकत की गई। छात्रा के मुताबिक, घटना के बाद उसे किसी से भी इस बारे में बात न करने की चेतावनी दी गई और डराया गया। शुरुआत में वह सहमी रही, लेकिन घर लौटने के बाद उसने पूरी घटना अपने परिवार को बताई, जिसके बाद मामला पुलिस तक पहुंचा।
दिल्ली में दर्ज हुई पहली शिकायत
घटना के कुछ दिनों बाद पीड़िता के परिवार ने दिल्ली के कमला नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले में जीरो एफआईआर दर्ज करने के बाद तुरंत कानूनी प्रक्रिया शुरू की। इसके तहत छात्रा का मेडिकल परीक्षण कराया गया और उसका बयान मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज किया गया, जिसके बाद जांच आगे बढ़ाई गई।
इंदौर आश्रम से हुई गिरफ्तारी
मामला जोधपुर ट्रांसफर होने के बाद राजस्थान पुलिस ने जांच तेज कर दी। इसके बाद पुलिस टीम ने अगस्त 2013 के आखिर में मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित आश्रम से आसाराम को हिरासत में लिया। पूछताछ के बाद उन्हें जोधपुर लाया गया, जहां अदालत में पेशी हुई और कोर्ट के आदेश पर उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
जमानत के लिए लंबी कानूनी लड़ाई
गिरफ्तारी के बाद आसाराम ने रिहाई के लिए निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक कई बार जमानत याचिकाएं दायर कीं। उनकी ओर से देश के कई चर्चित वकीलों ने अदालत में पक्ष रखा, लेकिन लंबे समय तक उन्हें राहत नहीं मिल सकी। तमाम कानूनी कोशिशों के बावजूद अदालतों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जमानत देने से इनकार किया।
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