नई दिल्ली: अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने नई दिल्ली में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग देशों के साथ कई तरह की साझेदारियां होती हैं, लेकिन रणनीतिक साझेदारी का महत्व सबसे अलग होता है। इसमें दोनों देशों के हित गहराई से जुड़े होते हैं और वे मिलकर वैश्विक चुनौतियों का सामना करते हैं। उन्होंने भारत को अमेरिका का अहम रणनीतिक साझेदार बताया और कहा कि यह रिश्ता साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, स्वतंत्र मीडिया और जनता के प्रति जवाबदेही पर आधारित है।
रुबियो ने आतंकवाद और वैश्विक व्यापार सुरक्षा पर जोर दिया
मार्को रुबियो ने कहा कि वैश्विक आतंकी नेटवर्क के कारण दोनों देशों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से आतंकवाद का सामना करना पड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार बिना किसी बाधा के जारी रहना चाहिए और किसी भी देश को अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर नियंत्रण का दावा नहीं करना चाहिए। उनका इशारा ईरान द्वारा होर्मुज जलमार्ग को लेकर दिए गए बयानों की ओर माना जा रहा है।
Addressing the media alongside US @SecRubio.
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) May 24, 2026
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जयशंकर ने रणनीतिक साझेदारी और प्रमुख वैश्विक मुद्दों पर की चर्चा
भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने बताया कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई है और आगे भी बातचीत जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की यह भारत की पहली यात्रा है और पद संभालने के बाद से लगातार संपर्क बना हुआ है। जयशंकर ने बताया कि अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी पर गहन चर्चा हुई, जिसमें पश्चिम एशिया, खाड़ी क्षेत्र, यूक्रेन और इंडो-पैसिफिक जैसे मुद्दे शामिल रहे। उन्होंने रक्षा सहयोग, 10 वर्षीय डिफेंस फ्रेमवर्क, अंडरवाटर डोमेन अवेयरनेस और मेक इन इंडिया पहल पर भी बात की। साथ ही ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार समझौते को जल्द पूरा करने पर जोर दिया गया।
परमाणु ऊर्जा सहयोग और वीजा मुद्दों पर हुई चर्चा
जयशंकर ने बताया कि परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग पर विस्तार से चर्चा हुई और शांति अधिनियम (Shanti Act) के पारित होने से नई संभावनाएं बनी हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों देश इस क्षेत्र में पूरी क्षमता से काम करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने कुछ नियामकीय मुद्दों और क्रिटिकल मिनरल्स के महत्व पर भी बात की।
उन्होंने आगे कहा कि AI समिट ने भारत-अमेरिका साझेदारी की संभावनाओं को उजागर किया है। साथ ही वैध यात्रियों को वीजा मिलने में आ रही चुनौतियों को भी अमेरिकी पक्ष के सामने रखा गया, ताकि कानूनी यात्रा पर असर न पड़े।
आतंकवाद के खिलाफ सहयोग बढ़ाने पर जोर
जयशंकर ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच कई साझा हित और चुनौतियां हैं, जिनमें आतंकवाद प्रमुख है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत इस मुद्दे पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाता है। उन्होंने कहा कि दोनों देश आतंकवाद के प्रसार को रोकने के लिए आपसी सहयोग को और मजबूत करेंगे।
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