पश्चिम बंगाल में दूसरे और अंतिम चरण की वोटिंग से पहले चुनाव आयोग ने अहम कदम उठाया है। दक्षिण 24 परगना के फाल्टा में तैनात संयुक्त बीडीओ का तबादला कर दिया गया। यह फैसला तृणमूल कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन के बाद आया, जो विशेष पुलिस पर्यवेक्षक अजय पाल शर्मा के दौरे को लेकर किया गया था। इसके अलावा, आयोग ने देर रात जारी एक अन्य आदेश में दो अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेटों को भी चुनावी जिम्मेदारियों से हटा दिया, जिनमें एक दक्षिण 24 परगना से जुड़ा अधिकारी शामिल था। हालांकि, इन कार्रवाइयों के पीछे की वजह साफ तौर पर नहीं बताई गई है।
फाल्टा में प्रशासनिक बदलाव
चुनाव आयोग ने फाल्टा में तैनात संयुक्त बीडीओ सौरभ हाजरा का तबादला करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से पुरुलिया भेज दिया है। यह फैसला मतदान से ठीक पहले लिया गया, जिससे प्रशासनिक हलकों में हलचल बढ़ गई है। आयोग के अनुसार, उनकी जगह राम्या भट्टाचार्य को नई जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, जो क्षेत्र में चुनावी व्यवस्थाओं की देखरेख करेंगी। फिलहाल इस बदलाव की खास वजह सामने नहीं आई है और इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बताया गया है।
‘सिंघम’ विवाद के बीच सख्त कार्रवाई
चुनाव आयोग ने एक अन्य आदेश में दक्षिण 24 परगना के एडीएम भास्कर पाल और बीरभूम के एडीएम सौविक भट्टाचार्य को चुनाव से जुड़ी जिम्मेदारियों से हटा दिया है। यह कदम उस समय उठाया गया है जब फाल्टा में 29 अप्रैल को मतदान होना है। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई विशेष पुलिस पर्यवेक्षक अजय पाल शर्मा के साथ सहयोग न करने के आरोपों के बीच की गई है। हाल ही में उनके एक दौरे के दौरान सत्ताधारी दल के नेता जहांगीर खान के आवास पर विरोध प्रदर्शन हुआ था, जिसके बाद यह मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया।
अजय पाल शर्मा के दौरे से बढ़ा सियासी तनाव
चुनाव आयोग की ओर से जारी आदेशों में कार्रवाई के कारणों का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है, लेकिन विशेष पुलिस पर्यवेक्षक अजय पाल शर्मा की गतिविधियों को लेकर विवाद तेज हो गया है। बताया जा रहा है कि वह केंद्रीय बलों के साथ देर रात एक स्थानीय नेता के घर पहुंचे और कथित तौर पर मतदाताओं को डराने की शिकायतों पर सख्त रुख अपनाया। अगले दिन उन्होंने संवेदनशील इलाकों में गश्त और तलाशी अभियान भी चलाया, जिससे माहौल और गरमा गया। इसी दौरान सत्तारूढ़ दल के समर्थक बड़ी संख्या में एकत्र हो गए और उनकी कार्रवाई के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया, जिसके चलते इलाके में तनाव बढ़ गया।
‘सिंघम’ के खिलाफ सड़क पर उतरे समर्थक
यूपी के एसीपी अजय पाल शर्मा, जिन्हें सख्त कार्रवाई के चलते ‘सिंघम’ कहा जाता है, उनके दौरे के दौरान तृणमूल कांग्रेस समर्थकों ने जोरदार विरोध जताया। जहां-जहां वे पहुंचे, वहां ‘वापस जाओ’ और ‘जय बांग्ला’ जैसे नारे लगाए गए। फाल्टा क्षेत्र, जो डायमंड हार्बर लोकसभा सीट के अंतर्गत आता है, संवेदनशील माना जाता है। यहां निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए कड़ी निगरानी और केंद्रीय बलों की तैनाती पहले से ही की गई थी, लेकिन विरोध प्रदर्शन के चलते माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया।
वीडियो सामने आने के बाद बढ़ा विवाद
यूपी कैडर के आईपीएस अजय पाल शर्मा का एक वीडियो सामने आने के बाद विवाद और तेज हो गया है। इसमें वे कथित तौर पर चुनाव में गड़बड़ी की कोशिश करने वालों को सख्त कार्रवाई की चेतावनी देते नजर आ रहे हैं। इस पर सत्तारूढ़ दल ने उन पर पद के दुरुपयोग और कार्यकर्ताओं को डराने के आरोप लगाए हैं। बताया जा रहा है कि केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की मौजूदगी और एक विशेष सूची के आधार पर उन्होंने लगातार दो दिनों तक दक्षिण 24 परगना के फाल्टा इलाके में गहन जांच और गश्त की, जिससे राजनीतिक माहौल और अधिक गरमा गया।
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