नई दिल्ली से इस समय एक अहम खबर सामने आई है। सोमवार सुबह राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में हल्के भूकंप के झटके महसूस किए गए। जानकारी के अनुसार भूकंप का केंद्र हरियाणा के रेवाड़ी में जमीन से करीब 5 किलोमीटर नीचे था। सुबह लगभग 7 बजकर 1 मिनट पर लोगों ने धरती में कंपन महसूस किया। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 2.8 मापी गई है।
आखिर धरती क्यों कांपती है?
धरती के अंदर कई बड़ी टेक्टोनिक प्लेटें मौजूद हैं, जो लगातार बहुत धीमी गति से खिसकती रहती हैं। जब ये प्लेटें आपस में टकराती हैं या इनके बीच दबाव बढ़ जाता है, तो अचानक ऊर्जा निकलती है और धरती हिलने लगती है। इसी प्रक्रिया को भूकंप कहा जाता है। कई बार तेज भूकंप से इमारतें गिर जाती हैं और जनजीवन पर बड़ा असर पड़ता है।
EQ of M: 2.8, On: 09/03/2026 07:01:50 IST, Lat: 28.31 N, Long: 76.42 E, Depth: 5 Km, Location: Rewari, Haryana.
— National Center for Seismology (@NCS_Earthquake) March 9, 2026
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भारत में भूकंप के खतरे को ऐसे बांटा गया है
भूवैज्ञानिकों के मुताबिक भारत का करीब 59 प्रतिशत हिस्सा भूकंप के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। इसी कारण वैज्ञानिकों ने देश को चार भूकंपीय जोन—जोन-2, जोन-3, जोन-4 और जोन-5 में बांटा है। इनमें जोन-5 सबसे अधिक खतरे वाला क्षेत्र है, जबकि जोन-2 अपेक्षाकृत कम जोखिम वाला माना जाता है। देश की राजधानी दिल्ली जोन-4 में आती है, जहां तेज तीव्रता के भूकंप आने की संभावना रहती है। हिमालयी क्षेत्र, कच्छ और पूर्वोत्तर भारत में भूकंप का खतरा ज्यादा माना जाता है, क्योंकि यहां भारतीय प्लेट और यूरेशियन प्लेट के बीच लगातार दबाव बनता रहता है।
रिक्टर स्केल से ऐसे मापी जाती है भूकंप की ताकत
भूकंप की तीव्रता को मापने के लिए रिक्टर स्केल का इस्तेमाल किया जाता है। इस पैमाने पर कम संख्या वाले भूकंप हल्के माने जाते हैं, जबकि संख्या बढ़ने के साथ नुकसान भी बढ़ता जाता है। करीब 4 से 5 तीव्रता के भूकंप में हल्का कंपन महसूस होता है और सामान हिल सकता है। 5 से 6 के बीच भूकंप आने पर भारी चीजें भी हिलने लगती हैं। 6 से ऊपर की तीव्रता में इमारतों को नुकसान पहुंच सकता है, जबकि 7 या उससे ज्यादा के भूकंप में बड़ी तबाही और इमारतों के गिरने का खतरा बढ़ जाता है। 8 या उससे अधिक तीव्रता वाले भूकंप बेहद विनाशकारी माने जाते हैं।
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