कर्नाल के मीरा घाटी में 82 साल के होम्योपैथ डॉक्टर डॉ. हरकिशन का निधन हो गया। हाल ही में ‘अपना आशियाना’ की टीम ने उन्हें उनके घर से रेस्क्यू किया था और आश्रम में शिफ्ट किया था। सब कुछ अचानक हुआ, तबियत बिगड़ी, अस्पताल ले जाया गया, और देर रात उन्होंने दम तोड़ दिया। इस वक्त उनका पार्थिव शरीर संस्था के पास है, परिवार से संपर्क किया जा रहा है।
गंदगी के बीच कट रहा था जीवन
डॉ. हरकिशन पिछले डेढ़ साल से अकेले रह रहे थे। जिस घर से उन्हें रेस्क्यू किया गया, वहां हालत बहुत खराब थी, चारों तरफ गंदगी, पुराने कपड़े, और जो भी खाने को मिल गया, उसी से काम चलाते थे। कभी-कभी बाहर से खाने का सामान मंगवा लेते थे। पास-पड़ोस के लोग बताते हैं, वे बहुत सादा और लापरवाह तरीके से रहते थे, अपनी हालत की ज्यादा फिक्र नहीं करते थे। फिर भी, एक जानकार का कहना है कि जितना मीडिया में बताया जा रहा है, सब कुछ उतना सच नहीं है। उनके मुताबिक, डॉक्टर अपनी मर्जी से अलग रहते थे और परिवार से उनका रिश्ता बना हुआ था। हकीकत जो भी हो, उनकी हालत देखकर हर कोई हैरान था।
परिवार से बना रखी थी दूरी
बताया गया कि डॉ. हरकिशन का अपनी पत्नी से काफी समय से अनबन चल रही थी, इसी वजह से दोनों अलग रहते थे। उनकी पत्नी ऑस्ट्रेलिया में रहती हैं, वहां सरकारी नौकरी से रिटायर हो चुकी हैं। उनकी दो बेटियां भी वहीं सेटल हैं। कहते हैं, उन्हें सेक्टर-7 में एक कोठी मिली थी, लेकिन डॉ. हरकिशन ने वहां रहना पसंद नहीं किया। किसी ने इसे उनका निजी फैसला बताया, तो किसी ने इसे परिवार से दूरी का नतीजा माना। सच जो भी हो, उम्र के इस मोड़ पर वे लगभग अकेले ही रह गए थे।
डॉक्टर का सेवा भाव
डॉ. हरकिशन होम्योपैथी के डॉक्टर थे और सालों तक लोगों का इलाज करते रहे। उनके घर में किताबों का ढेर था, पढ़ने-लिखने का शौक साफ झलकता था। आसपास के लोग बताते हैं, अगर कोई उनके पास आ गया तो नब्ज देखकर दवा दे देते थे। खास बात ये थी कि वे कभी फीस नहीं मांगते थे। लोग जो अपनी मर्जी से दे जाते, उसी में उनका खर्च चलता था। एक परिचित रोज उनके लिए चाय-खाना लेकर आता था।
अंतिम संस्कार को लेकर असमंजस
अभी ‘अपना आशियाना’ की टीम उनका अंतिम इंतज़ाम देख रही है। परिवार को खबर दे दी गई है, लेकिन ये साफ नहीं है कि वो अंतिम संस्कार के लिए आएंगे या नहीं। हो सकता है कोई रिश्तेदार या जान-पहचान वाला आगे आकर ये जिम्मेदारी निभाए।
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