भारत सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। 1 अप्रैल 2026 से देशभर में केवल E20 पेट्रोल ही बेचा जाएगा, जिसका मतलब है कि पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल मिलाया जाएगा। यह नियम सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होगा, और 95 RON रेटिंग वाले पेट्रोल में भी एथनॉल मिलाना अनिवार्य होगा। सरकार का उद्देश्य पर्यावरण सुधारना और पेट्रोल आयात पर निर्भरता कम करना है।
पेट्रोलियम मंत्रालय का बड़ा निर्देश
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने तेल कंपनियों को आदेश दिया है कि 1 अप्रैल 2026 से केवल 20% एथनॉल मिश्रित पेट्रोल बेचा जाए। साथ ही, फ्यूल की RON रेटिंग कम से कम 95 होनी चाहिए, जो भारतीय मानक ब्यूरो के दिशा-निर्देशों के अनुसार तय की गई है। इससे पूरे देश में एक समान फ्यूल नीति लागू होगी और वाहन निर्माताओं के लिए इंजन डिज़ाइन करना आसान होगा।
RON 95 क्या है?
RON का मतलब रिसर्च ऑक्टेन नंबर होता है, जो यह दर्शाता है कि पेट्रोल इंजन में कितने दबाव को सहन कर सकता है। RON 95 का अर्थ है कि यह पेट्रोल अधिक दबाव झेलने की क्षमता रखता है और इंजन में समय से पहले आग नहीं पकड़ता। इससे इंजन की कार्यक्षमता बेहतर होती है और गाड़ी का प्रदर्शन स्मूद रहता है।
Ethanol मिश्रण से भारत ने बचाई 1.40 लाख करोड़ रुपये
तेल मंत्रालय के मुताबिक, 2014-15 से अब तक पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण करने से भारत ने 1.40 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा बचाई है, जिससे कच्चे तेल के आयात पर खर्च कम हुआ है। एथनॉल गन्ना, मक्का, चावल और कृषि अवशेषों से तैयार किया जा रहा है, जिससे किसानों को लाभ मिल रहा है और देश में रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं। सरकार और वाहन कंपनियां E20 पेट्रोल के लिए इंजन तैयार कर रही हैं, और नई गाड़ियां आसानी से E20 पर चल सकती हैं। पुराने वाहनों के लिए कंपनियां दिशा-निर्देश दे रही हैं, इसलिए उपभोक्ताओं को ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है।
Ethanol मिश्रण से प्रदूषण में कमी
एथनॉल मिश्रण से कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी। नीति आयोग के अनुसार, गन्ने से बने एथनॉल से पेट्रोल की तुलना में लगभग 65 प्रतिशत कम ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जित होती है, जबकि मक्का आधारित एथनॉल से यह कमी 50 प्रतिशत तक होती है।
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