दुनिया में बढ़ते राजनीतिक तनाव, आर्थिक संकट और जलवायु परिवर्तन के बीच वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल फाउंडेशन (WIF) ने 2026 के लिए जिम्मेदार देशों की रैंकिंग जारी की है। इस सूची में सिंगापुर को सबसे जिम्मेदार देश के रूप में चुना गया है, क्योंकि उसने शासन, समाज और पर्यावरण के क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य किया है।
स्विट्जरलैंड और डेनमार्क क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। इन देशों को पारदर्शी प्रशासन, सामाजिक सुरक्षा और वैश्विक जिम्मेदारियों को निभाने के लिए सराहा गया है। यह रिपोर्ट आम वैश्विक रैंकिंग से अलग है, क्योंकि इसमें केवल सैन्य शक्ति या आर्थिक ताकत का नहीं, बल्कि यह आंका गया है कि देश अपने नागरिकों और वैश्विक समुदाय के लिए कितनी जिम्मेदारी निभाता है।
इस इंडेक्स में दुनिया के 154 देशों को चार प्रमुख मानदंडों पर आंका गया है:
- पारदर्शी और ईमानदार शासन
- सामाजिक भलाई और कल्याण
- पर्यावरण संरक्षण
- वैश्विक जिम्मेदारी
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि बड़ी आर्थिक ताकत होने के बावजूद कई देश नीचे रैंक कर गए हैं। अमेरिका 66वें और चीन 68वें स्थान पर हैं, जो यह दिखाता है कि केवल आर्थिक शक्ति या सैन्य ताकत से जिम्मेदारी का आकलन नहीं किया जा सकता। पाकिस्तान इस सूची में 90वें स्थान पर है।
यूरोप इस सूची में आगे
यूरोप के कई देशों ने इस सूची में शीर्ष स्थान प्राप्त किया है, जो उनके मजबूत शासन और सामाजिक जिम्मेदारी को दर्शाता है। वहीं, युद्ध और संकट से प्रभावित देशों की स्थिति कमजोर रही है। सीरिया 153वें और यमन 151वें स्थान पर रहे, जो इस सूची में सबसे निचले स्थान पर हैं।
क्या है भारत की रैंकिंग?
भारत को इस सूची में 16वां स्थान मिला है, और उसका स्कोर 0.5515 रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने स्वास्थ्य सेवाओं, सामाजिक समानता, पर्यावरणीय योजनाओं और जनता केंद्रित नीतियों में अच्छा काम किया है। हालांकि, रिपोर्ट यह भी कहती है कि भारत को दीर्घकालिक सुधार के लिए संतुलित विकास और लगातार नीति पर ध्यान केंद्रित करना होगा। कुल मिलाकर, यह रिपोर्ट यह साबित करती है कि जिम्मेदारी केवल ताकत से नहीं, बल्कि सही नीतियों और लोगों के भले के लिए किए गए कार्यों से बनती है।
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