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भारत को मिला अपना पहला प्रदुषण कंट्रोल करने वाला जहाज ‘ICGS समुद्र प्रताप’, तारीफ में पीएम मोदी ने कही ये बात

PM नरेंद्र मोदी ने ICGS समुद्र प्रताप को भारत की आत्मनिर्भरता, समुद्री सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। यह जहाज तट रक्षक की क्षमता बढ़ाएगा।

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भारत समुद्री सुरक्षा और जहाज निर्माण के क्षेत्र में लगातार आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। इसी सिलसिले में, भारतीय तट रक्षक का नया जहाज ICGS समुद्र प्रताप कमीशन हुआ, और सच कहें तो, ये देश के लिए बड़ी बात है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस मौके को खास बताया। उन्होंने सोशल मीडिया पर साफ-साफ लिखा कि ये जहाज न सिर्फ सुरक्षा को मजबूत करता है, बल्कि देश की पर्यावरण के लिए गंभीरता भी दिखाता है।

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पीएम ने इसे आत्मनिर्भर भारत की सोच को और पक्का करने वाला कदम कहा। इस जहाज को गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) ने बनाया है, यानी पूरी तरह अपने दम पर। डिजाइन भी ऐसा कि आज के दौर की जरूरतें पूरी हों, चाहे समुद्री प्रदूषण कंट्रोल करना हो या इमरजेंसी से निपटना।

स्वदेशी जहाज निर्माण की बड़ी उपलब्धि

ICGS समुद्र प्रताप, अब तक भारतीय तट रक्षक के पास सबसे बड़ा और सबसे मॉडर्न जहाज है। इसका काम फरवरी 2022 में शुरू हुआ, और जनवरी 2026 में इसे कमीशन किया गया। खास बात? इसमें 60% से ज्यादा सामान देश में ही बना है। 114.5 मीटर लंबा, करीब 4,200 टन वजनी ये जहाज एक बार में 6,000 नॉटिकल मील तक जा सकता है। 22 नॉट की स्पीड है, मतलब लंबे ऑपरेशन भी आसानी से कर सकता है। यह GSL के दो प्रदूषण नियंत्रण जहाजों में से पहला है, आगे चलकर इससे तट रक्षक की ताकत और बढ़ेगी, खासकर जब पर्यावरण से जुड़ी कोई मुसीबत आए।

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प्रदूषण नियंत्रण में अत्याधुनिक तकनीक

इस जहाज की सबसे बड़ी खूबी है, इसकी एडवांस्ड प्रदूषण कंट्रोल टेक्नोलॉजी। समुद्र में अगर तेल फैल जाए या कोई और गड़बड़ हो तो इसमें साइड-स्वीपिंग आर्म्स, हाई-कैपेसिटी ऑयल रिकवरी सिस्टम, फ्लोटिंग बूम्स और एडवांस्ड स्किमर्स लगे हैं। जहाज पर अलग से प्रदूषण कंट्रोल लैब भी है, जिससे तुरंत सैंपल की जांच हो सकती है और फैसले लिए जा सकते हैं। पोर्टेबल बार्जेस से जो भी तेल या गंदगी जमा होगी, उसे सुरक्षित रखा जा सकता है। ये सब मिलकर भारत के तटीय इलाकों, बंदरगाहों और समुद्री रास्तों को बड़े खतरे से बचाने में बेहद काम आएगा।

इमरजेंसी स्थितियों में मजबूत सुरक्षा कवच

ICGS समुद्र प्रताप सिर्फ प्रदूषण से ही नहीं, बल्कि हर तरह की समुद्री इमरजेंसी से निपटने के लिए तैयार है। इसमें जबरदस्त एक्सटर्नल फायर फाइटिंग सिस्टम (Fi-Fi Class 2) है, जो किसी भी जहाज या ऑफशोर इंस्टॉलेशन पर लगी बड़ी आग बुझा सकता है। साथ ही, डायनेमिक पोजिशनिंग सिस्टम, इंटीग्रेटेड ब्रिज सिस्टम और ऑटोमेटेड पावर मैनेजमेंट जैसे फीचर्स हैं, जो मुश्किल वक्त में भी जहाज को सही और सुरक्षित चलाते हैं। सुरक्षा के लिए इसमें 30 मिमी की मुख्य गन और दो 12.7 मिमी की रिमोट कंट्रोल्ड गन लगी हैं।

भारतीय तट रक्षक की बढ़ी ताकत

ICGS समुद्र प्रताप को 14 अधिकारी और 115 कर्मचारी मिलकर चलाएंगे, और ये कोच्चि में तैनात रहेगा। हर तट रक्षक जहाज की कमीशनिंग उसके असली ऑपरेशन की शुरुआत होती है, और समुद्र प्रताप के आने से तट रक्षक अब निगरानी, कानून लागू करने, खोज और बचाव में और मजबूत हो गया है। ये भारत का पहला पूरी तरह स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण जहाज है। इससे समुद्री पर्यावरण की सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा, दोनों को ही नया सहारा मिलेगा। ICGS समुद्र प्रताप सिर्फ एक जहाज नहीं है, ये भारत की तकनीकी ताकत, आत्मनिर्भर सोच और समुद्र की हिफाजत के प्रति हमारी जिम्मेदारी का असली सबूत है।

Keywords: ICGS Samudra Pratap, Indian Coast Guard, Indigenous Warship, Pollution Control Vessel, Maritime Security, Atmanirbhar Bharat, Goa Shipyard Limited

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