राजनीति में कोई किसी का स्थायी साथी नहीं होता। कब क्या हो जाए, इसकी कोई कल्पना नहीं कर सकता। महाराष्ट्र में कुछ ऐसा ही देखने को मिला, जब हमेशा एक-दूसरे के विरोधी रहे कांग्रेस और बीजेपी एक साथ आ गए। अंबरनाथ नगर परिषद के अध्यक्ष पद को लेकर हुए इस बड़े राजनीतिक उलटफेर ने सियासी पारा बढ़ा दिया। इस समीकरण में बीजेपी, कांग्रेस और अजित पवार की एनसीपी एक ही मंच पर नजर आईं।
बीजेपी के लिए मददगार बनीं कांग्रेस और एनसीपी
अंबरनाथ नगर परिषद चुनाव में एकनाथ शिंदे की शिवसेना 23 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन इसके बावजूद वह काउंसिल प्रेसिडेंट का पद हासिल नहीं कर सकी। बीजेपी ने कांग्रेस और अजित पवार गुट की एनसीपी का समर्थन लिया। इनके सहयोग से बीजेपी के पास कुल 32 सदस्यों का समर्थन हो गया और 59 सदस्यीय नगर परिषद में उसने बहुमत के साथ अध्यक्ष पद अपने नाम कर लिया।
शिंदे गुट के विधायक नाराज़
इस राजनीतिक गठबंधन को लेकर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे गुट में नाराज़गी देखने को मिली। शिंदे गुट के विधायक डॉ. बालाजी किनिकर ने बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस-मुक्त भारत की बात करने वाली बीजेपी ने कांग्रेस से हाथ मिलाकर शिवसेना पर हमला किया है। शिवसेना ने इसे पीठ में छुरा घोंपने जैसा बताया, जबकि बीजेपी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।
श्रीकांत शिंदे ने उठाए सवाल
इस पूरे मामले पर श्रीकांत शिंदे ने कहा कि अंबरनाथ में भाजपा और कांग्रेस के साथ आने से जुड़े सवाल पूरी तरह बीजेपी से ही पूछे जाने चाहिए और इसका जवाब भी भाजपा के नेता ही देंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा और शिवसेना कई वर्षों से केंद्र, राज्य और स्थानीय स्तर पर गठबंधन में साथ काम कर रही हैं और यह गठबंधन मजबूत बना रहना चाहिए।
श्रीकांत शिंदे ने यह भी कहा कि अंबरनाथ में अब तक शिवसेना की सत्ता रही है और वहां अच्छे विकास कार्य किए गए हैं। आगे जो भी फैसला लिया जाएगा, शिवसेना विकास की राजनीति करने वालों के साथ खड़ी रहेगी।
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