सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ ने राजधानी दिल्ली में 2020 के दंगों से जुड़े कथित साजिश मामले में शरजील इमाम और उमर खालिद की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। वहीं, अदालत ने इस मामले में अन्य आरोपियों शिफा-उर-रहमान, मोहम्मद सलीम खान, शादाब अहमद, गुलफिशा फ़ातिमा और मीरान हैदर—को जमानत दे दी है। हालांकि, कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि इन सभी आरोपियों के खिलाफ यूएपीए (UAPA) के तहत मुकदमा चलता रहेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में क्या कहा?
अदालत ने कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम अभियोजन और उपलब्ध सबूतों के लिहाज़ से “गुणात्मक रूप से अलग स्थिति” में हैं। कोर्ट के मुताबिक, कथित अपराधों में इन दोनों की भूमिका “केंद्रीय” रही है। अदालत ने यह भी कहा कि इन दोनों की हिरासत की अवधि भले ही लगातार और लंबी रही हो, लेकिन यह न तो संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करती है और न ही कानूनों के तहत लगाए गए वैधानिक प्रतिबंधों को दरकिनार करती है।
#WATCH | Delhi: Sarim Javed, lawyer for Gulfisha, says, "…The five who have been granted bail, the Supreme Court has said that their culpability, if any, is at a lower level and for the two that have not been granted bail, SC has said that we are not commenting on their… pic.twitter.com/qjQEwAbe8n
— ANI (@ANI) January 5, 2026
अश्विनी कुमार की प्रतिक्रिया
पूर्व कानून मंत्री अश्विनी कुमार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट अपने सामने मौजूद रिकॉर्ड के आधार पर मामलों का फैसला करता है। उन्होंने कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि अदालत ने दोनों तरह के मामलों के बीच अंतर करने के ठोस कारण पाए होंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि आज इस देश के स्वतंत्रतावादी (लिबर्टेरियन) इस फैसले से सबसे ज़्यादा असंतुष्ट होंगे, क्योंकि उमर खालिद और शरजील इमाम लंबे समय से जेल में हैं। सुप्रीम कोर्ट के अपने ही फैसलों में कहा गया है कि लंबी अवधि तक जेल में रहना जमानत देने पर विचार का एक अहम आधार होना चाहिए। आखिरकार, एक बार स्वतंत्रता छिन जाने के बाद उसकी भरपाई संभव नहीं होती।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 2020 दिल्ली दंगों के कथित बड़े साजिश मामले में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं।
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