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PMC Election: महानगरपालिका चुनाव में हो रहा गजब का कारनामा, अपने ही दल के नेता का AB फॉर्म छीनकर निगल गए एकनाथ शिंदे के उम्मीदवार

पुणे नगर निगम चुनाव में शिवसेना के एक उम्मीदवार पर आरोप लगा है कि उसने प्रतिद्वंद्वी का AB फॉर्म फाड़कर निगल लिया। इस घटना ने चुनावी प्रक्रिया और पार्टी के विवादों को सवालों में डाला।

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महाराष्ट्र में 15 जनवरी को होने वाले महानगरपालिका चुनाव जैसे-जैसे नज़दीक आ रहे हैं, राजनीतिक हलचल तेज़ होती जा रही है। मुंबई में डुप्लीकेट AB फॉर्म का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि पुणे नगर निगम चुनाव से एक अजीबोगरीब और सनसनीखेज घटना सामने आ गई। धनकावाड़ी–सहकारनगर वार्ड ऑफिस में ऐसा बवाल हुआ कि लोगों के होश उड़ गए। यहां शिवसेना के दो उम्मीदवारों के बीच झगड़ा इतना बढ़ा कि मामला सीधा थाने पहुंच गया। पुलिस ने शिवसेना के उम्मीदवार उद्धव कांबले (34) के खिलाफ केस दर्ज कर लिया, जिससे चुनावी पारा और चढ़ गया।

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AB फॉर्म बना विवाद की जड़

वार्ड नंबर 34 में शिवसेना ने दो उम्मीदवारों को AB फॉर्म दे दिए, और यहीं से बवाल शुरू हो गया। पार्टी के लिए ये वार्ड काफी अहम माना जा रहा है, तो टिकट को लेकर अंदर ही अंदर काफी रस्साकशी चल रही थी। उम्मीदवार उद्धव कांबले और मच्छिंद्र धवले के बीच वार्ड ऑफिस में जमकर बहस हुई। इसी बहस में, आरोप है कि कांबले ने धवले के हाथ से AB फॉर्म छीने, उन्हें फाड़ा और गुस्से में आकर फॉर्म निगल गए। वहां मौजूद लोगों को यकीन ही नहीं हुआ कि ये सब उनकी आंखों के सामने हो रहा है। आमतौर पर राजनीतिक लड़ाइयां बस ज़ुबानी जंग तक सीमित रहती हैं, लेकिन इस बार बात कुछ ज़्यादा ही आगे बढ़ गई।

चुनावी प्रक्रिया पर उठे सवाल

मच्छिंद्र धवले ने थाने में शिकायत दर्ज कराई, और पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए केस दर्ज कर लिया। पुलिस का कहना है कि सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डालने और सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने के आरोप में केस बना है। जांच चल रही है और आगे की कार्रवाई तथ्यों पर होगी। इस पूरे मामले ने शिवसेना की अंदरूनी लड़ाई को सबके सामने ला दिया है, और ये भी साफ कर दिया है कि टिकट और दस्तावेज़ों को लेकर किस हद तक तनाव पहुंच चुका है। चुनाव आयोग और प्रशासन के लिए ये घटना इसलिए भी अहम है, क्योंकि AB फॉर्म को चुनावी प्रक्रिया की रीढ़ कहा जाता है।

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AB फॉर्म क्या है?

बात करें AB फॉर्म की, तो ये हर उम्मीदवार के लिए सबसे जरूरी दस्तावेज़ होता है। फॉर्म ‘A’ और ‘B’ से ही पार्टी अपने आधिकारिक उम्मीदवार की घोषणा करती है। इन्हीं के आधार पर नामांकन वैध माना जाता है। पुणे नगर निगम समेत पूरे महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिकाओं में 15 जनवरी को वोटिंग होनी है। ऐसे में इस तरह की घटनाएं चुनावी पारदर्शिता और सियासी माहौल पर बड़े सवाल उठा देती हैं। अब सबकी नजर इस पर है कि प्रशासन और राजनीतिक दल इस वाकये से क्या सबक लेते हैं और क्या आगे चुनावी प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष रख पाएंगे?

Keywords: Maharashtra Municipal Election, Pune Municipal Corporation, AB Form Controversy, Shiv Sena Internal Conflict, Election Process India

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