महाराष्ट्र में बीएमसी चुनाव से ठीक पहले हुए स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों से बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के हौसले बुलंद हैं। वहीं, करारी हार के बाद शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) और एनसीपी की टेंशन बढ़ गई है।
इस बीच कयास लगाए जा रहे थे कि राज ठाकरे की मनसे और उद्धव ठाकरे की शिवसेना बीएमसी चुनाव में साथ आकर मोर्चा संभालेंगी, लेकिन मनसे का खाता तक नहीं खुल सका, जिससे विपक्ष की चिंता और बढ़ गई है।
यह साफ संकेत है कि महायुति के सामने एमवीए का टिकना मुश्किल नजर आ रहा है। ऐसे में अब उद्धव ठाकरे, शरद पवार और राज ठाकरे के खेमे में मंथन का दौर शुरू हो गया है।
महायुति की प्रचंड जीत
बता दें कि पहले दो चरणों में 288 नगर परिषदों और नगर पंचायतों के चुनाव परिणामों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 129 निकायों में जीत दर्ज कर अकेली सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर सामने आई।
वहीं, सहयोगी दलों की सीटों को जोड़ दें तो महायुति गठबंधन ने 200 का आंकड़ा पार करते हुए अपनी मजबूती का स्पष्ट संदेश दे दिया।
एक नज़र आंकड़ों पर 👇
सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन (कुल: 207 सीटें)
- भाजपा: 117
- शिवसेना (एकनाथ शिंदे): 53
- राकांपा (अजित पवार): 37
विपक्षी महा विकास आघाड़ी – MVA (कुल: 44 सीटें)
- कांग्रेस: 28
- राकांपा (शरद पवार): 7
- शिवसेना (उद्धव ठाकरे): 9
अंतिम परिणाम
- महायुति: 207
- MVA: 44
- अन्य + निर्दलीय: 37
- कुल: 288 अध्यक्ष पद
बीएमसी चुनाव बनेगी साख की लड़ाई
निकाय चुनाव के नतीजों ने जहां महायुति खेमे में जीत की लहर ला दी है, वहीं विपक्षी खेमे की चिंता बढ़ा दी है।
अब साख बचाने और वापसी के लिए उद्धव ठाकरे और उनके सहयोगी दल कमर कसते नजर आ रहे हैं, जबकि बीजेपी, शिवसेना और एनसीपी इस जीत की लय को बीएमसी चुनाव में भी बरकरार रखना चाहती हैं।
कब हैं बीएमसी चुनाव
बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) और राज्य के 28 अन्य नगर निगमों के चुनावों को सेमीफाइनल माना जा रहा है।
राज्य चुनाव आयोग के अनुसार, 15 जनवरी को मतदान होगा और 16 जनवरी को वोटों की गिनती की जाएगी।
इन चुनावों में कुल 2,869 सीटों पर मुकाबला होगा, जिसमें करीब 3.48 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे।
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