भारतीय फिल्म ‘धुरंधर’ इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। फिल्म को लेकर जहां कई मुस्लिम देशों में इसे बैन कर दिया गया है, वहीं भारत के पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में इसे लेकर बवाल मचा हुआ है। ‘धुरंधर’ न सिर्फ अपनी कहानी को लेकर चर्चा में है, बल्कि कमाई के मामले में भी शानदार प्रदर्शन कर रही है।
फिल्म की कहानी पाकिस्तान के उस काले साम्राज्य पर आधारित है, जो उसकी असलियत को उजागर करती है। साथ ही यह दिखाती है कि वह दौर कितना खौफनाक था और किस तरह साजिशों के जरिए आतंकवाद को पनाह दी जाती थी। फिल्म में जावेद खानानी और अल्ताफ खानानी नाम के दो अहम किरदारों को भी दिखाया गया है।
दुबई से चल रहा था काला कारोबार
ये दोनों भाई दुबई की आलीशान इमारतों से हवाला, शैडो बैंकिंग और ग्लोबल फाइनेंस का कारोबार चलाते थे। इस काले धंधे में उनकी महारत ऐसी थी कि उन्हें पाकिस्तान के मनी लॉन्ड्रिंग का किंग माना जाता था।
खनानी ब्रदर्स का मुख्य मकसद भारत को आर्थिक नुकसान पहुंचाना और ISI की छत्रछाया में आतंकवाद को फंडिंग करना था। फिल्म में दिखाई गई कहानी से भी कहीं ज्यादा खौफनाक थी इन दोनों भाइयों की असली दास्तान।
खानानी एंड कालिया इंटरनेशनल
जावेद खानानी और अल्ताफ खानानी, जिन्हें खनानी ब्रदर्स के नाम से जाना जाता था, की एक कंपनी थी — KKI (Khanani & Kalia International) जब अमेरिका को इनके आपराधिक नेटवर्क की जानकारी मिली, तो इस कंपनी पर प्रतिबंध लगा दिया गया। अमेरिका ने KKI को अंतरराष्ट्रीय आपराधिक संगठन घोषित कर दिया था।
खनानी ब्रदर्स का नेटवर्क
खनानी ब्रदर्स का नेटवर्क पाकिस्तान के कराची से लेकर पूर्वी अफ्रीका तक फैला हुआ था। इसके अलावा इनके तार भारत के खिलाफ काम कर रहे आतंकी संगठनों , लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और डी-कंपनी से जुड़े हुए थे। इनका काम आतंकियों को फंडिंग दिलाना, हवाला के पैसे घुमाना और जरूरत का सामान उपलब्ध कराना था।
2016 में जावेद खानानी की रहस्यमयी मौत
साल 2016 में जावेद खानानी की रहस्यमयी मौत हो गई। वह अचानक एक इमारत से गिर पड़ा और उसकी जान चली गई।
यह घटना ऐसे समय पर हुई थी, जब भारत ने नोटबंदी जैसा बड़ा कदम उठाकर नकली नोट और हवाला कारोबार पर करारा प्रहार किया था। इस फैसले से हवाला नेटवर्क की कमर टूट गई थी। इसी दौरान जावेद खानानी की मौत हुई, जो आज भी रहस्य बनी हुई है।
अल्ताफ खानानी का अंत
जावेद की मौत के बाद अल्ताफ खानानी ने इस काले साम्राज्य को आगे बढ़ाने की कोशिश की। उसकी गिनती दुनिया के सबसे बड़े हवाला कारोबारियों में होने लगी थी। उसका नेटवर्क यूरोप, उत्तरी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया तक फैला हुआ था।
हालांकि, जावेद की मौत के बाद अमेरिका ने अल्ताफ को गिरफ्तार कर पाकिस्तान डिपोर्ट कर दिया, जहां वह करीब तीन साल तक जेल में रहा।
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