गांधी परिवार को नेशनल हेराल्ड केस में बड़ी राहत मिली है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने गांधी परिवार के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) की शिकायत पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया है। अदालत के इस फैसले को गांधी परिवार के लिए अहम राहत के तौर पर देखा जा रहा है। साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सोनिया गांधी और अन्य परिवार के सदस्यों को फिलहाल एफआईआर की कॉपी उपलब्ध नहीं कराई जाएगी। हालांकि अदालत ने ED को जांच जारी रखने की अनुमति दे दी है।
प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी चार्जशीट में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, सैम पित्रोदा, सुमन दुबे, सुनील भंडारी, यंग इंडियन और डोटेक्स मर्चेंडाइज प्राइवेट लिमिटेड को आरोपी के रूप में चिन्हित किया था। इस कार्रवाई को कांग्रेस ने राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताया है। वहीं ED का दावा है कि जांच के दौरान गंभीर अपराध, फर्जीवाड़े और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े सबूत सामने आए हैं।
प्रवर्तन निदेशालय ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर एक बड़े घोटाले से जुड़े आरोप लगाए हैं। एजेंसी के अनुसार, कांग्रेस नेताओं ने कथित तौर पर साजिश के तहत एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) की लगभग 2,000 करोड़ रुपये की संपत्तियों पर नियंत्रण हासिल किया। ED का कहना है कि यह अधिग्रहण निजी कंपनी ‘यंग इंडियन’ के जरिए महज 50 लाख रुपये में किया गया, जिसमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी की 76 प्रतिशत हिस्सेदारी बताई गई है।
प्रवर्तन निदेशालय का यह भी दावा है कि इस मामले में ‘अपराध से अर्जित आय’ करीब 988 करोड़ रुपये है, जबकि इससे जुड़ी संपत्तियों का मौजूदा बाजार मूल्य लगभग 5,000 करोड़ रुपये आंका गया है।
क्या है नेशनल हेराल्ड केस
जिस नेशनल हेराल्ड केस में राहुल गांधी और सोनिया गांधी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है, उसका संबंध नेशनल हेराल्ड अखबार से है। इस अखबार की शुरुआत वर्ष 1938 में देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने करीब 5,000 स्वतंत्रता सेनानियों के सहयोग से की थी। नेशनल हेराल्ड का प्रकाशन एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) द्वारा किया जाता था। वर्ष 2008 में अखबार का प्रकाशन बंद हो गया, जिसके बाद इसके अधिग्रहण को लेकर विवाद शुरू हुए और कथित घोटाले से जुड़ी खबरें सामने आने लगीं।
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