दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को DGCA (Directorate General of Civil Aviation) से पूछा है कि उनका पायलट यूनियनों की अवमानना याचिका पर क्या कहना है। फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स और इंडियन पायलट्स गिल्ड का आरोप है कि DGCA ने कोर्ट में किए वादों के उलट एयरलाइंस को पायलटों की ड्यूटी और उड़ान समय के नियमों में छूट दे दी। जस्टिस अमित शर्मा ने DGCA को नोटिस भेजकर अगली सुनवाई अप्रैल 2026 के लिए डाल दी है। ये पूरा विवाद पायलटों की थकान से जुड़े नियमों को लेकर है, जो फ्लाइट सेफ्टी के लिहाज से बेहद अहम माने जाते हैं।
2012 से चल रही है कानूनी लड़ाई
इस केस की शुरुआत 2012 से हुई थी, जब पायलट संगठनों ने पहली बार कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनकी मांग थी कि भारत के FDTL यानी फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन के नियम इंटरनेशनल सेफ्टी स्टैंडर्ड्स के मुताबिक किए जाएं। फरवरी 2025 में जस्टिस तारा वितस्ता गंजू की बेंच के सामने DGCA ने हलफनामा देकर कहा था कि वे नए नियम फेज़ वाइज लागू करेंगे, 15 प्रावधान 1 जुलाई 2025 तक और बाकी 7 प्रावधान 1 नवंबर 2025 तक पूरे हो जाएंगे। कोर्ट ने तब साफ तौर पर कहा था, ये डेडलाइंस फिक्स रहेंगी।
एयरलाइंस को छूट देने का आरोप
अब पायलट यूनियन का कहना है कि DGCA ने इस तय रोडमैप के बावजूद अक्टूबर 2025 में कई एयरलाइंस जैसे एयर इंडिया, इंडिगो, स्पाइसजेट, अलायंस एयर, अकासा एयर और कार्गो ऑपरेटर्स ब्लू डार्ट एविएशन, क्विकजेट को छूट और एक्सटेंशन दे दिया। FIP का कहना है कि ऐसी कोई “असाधारण परिस्थिति” नहीं थी कि ये छूट दी जातीं, और इससे कॉकपिट में अलर्टनेस और पैसेंजर सेफ्टी दोनों पर खतरा बढ़ता है। यूनियनों का ये भी आरोप है कि DGCA ने न तो पायलट संगठनों को ये बदलाव बताए, न ही कोर्ट से इजाजत ली।
DGCA ने आरोपों को नकारा
DGCA ने अवमानना के आरोपों को नकारते हुए कहा कि कोर्ट ने CAR 2024 के नियमों को स्थायी रूप से “फ्रीज” नहीं किया था। DGCA का कहना है कि उसे Aircraft Act, 1934 और Aircraft Rules के तहत अस्थायी छूट और बदलाव देने का हक है। DGCA के मुताबिक, दी गई छूटें अस्थायी थीं, सिर्फ कुछ एयरलाइंस के लिए थीं और इनकी रेगुलर समीक्षा भी हो रही थी, जबकि CAR 2024 अब भी पूरी तरह लागू है। कोर्ट ने अभी इतना ही साफ किया है कि ये देखना जरूरी है कि हलफनामे के बाद हुए ये बदलाव कोर्ट की अवमानना में आते हैं या नहीं। DGCA के जवाब के बाद ही तय होगा कि ये मामला रेगुलेटर के अधिकार का है या जानबूझकर कोर्ट के आदेशों से हटने का।
Keywords: DGCA, Delhi High Court, Pilot Fatigue, FDTL Norms, Aviation Safety

